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जेन ज़ी में लोकप्रिय हो रहा है 'नो आईटिननरी' ट्रिप, थकान घटाने में क्यों होता है मददगार

दुनिया भर में एक नया ट्रैवल ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है - 'नो-आईटिनरेरी वेकेशन' यानी बिना किसी तय योजना के छुट्टियां बिताना।

By Moumita Bhattacharya

Jun 02, 2026 18:20 IST

छुट्टियों पर जाने से तीन महीने पहले तक कलर-कोडेड एक्सेल शीट बनाना, किस दिन किस रेस्टोरेंट में लंच किया जाएगा, कौन से होटल में रुकना है उसकी पहले से बुकिंग करना और गूगल मैप देखकर 'मस्ट-विजिट' जगहों की लिस्ट तैयार करना - अब तक इसे ही स्मार्ट ट्रैवल का तरीका माना जाता था।

लेकिन समय के साथ सोच भी बदल रही है। आज के जेन ज़ी और मिलेनियल टूरिस्ट इस तरह की पहले से प्लानिंग को अब एक तरह का 'रेड फ्लैग' या तनाव का कारण मानने लगे हैं।

इसी सोच के चलते दुनिया भर में एक नया ट्रैवल ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है - 'नो-आईटिनरेरी वेकेशन' (No-Itinerary Vacation) यानी बिना किसी तय योजना के छुट्टियां बिताना।

क्या है 'नो-आईटिनरेरी वेकेशन'?

अगर सीधे और सरल शब्दों में कहे तो इस तरह के ट्रैवल प्लान में सिर्फ डेस्टिनेशन ही पूर्व निर्धारित होता है। जाने की तारीख और वापस लौटने का कंफर्म टिकट फिक्स होने के अलावा और कुछ फिक्स्ड नहीं होता है।

कहां जाना है, क्या खाना है या क्या-क्या देखना है इससे संबंध में पहले से कोई प्लान नहीं होता है। यह सुनकर लोग सोच सकते हैं कि ऐसा भला कोई ट्रैवल प्लान हो सकता है क्या? यह तो लापरवाही होगी।

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लेकिन मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह की छुट्टियां मानसिक थकान को कम करने का काम करती है।

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि अगर छुट्टियों में भी कॉरपोरेट ऑफिस के प्रोजेक्ट मैनेजमेंट की तरह हर घंटे का शेड्यूल फॉलो करना पड़े तो वह आराम देने के बजाय और थकान बढ़ा देता है। अगर ट्रिप के चौथे दिन दोपहर में क्या खाना है, यह भी पहले से तय हो तो वह ट्रिप 'वेकेशन' कम और 'असाइनमेंट' ज्यादा बन जाती है।

घर और बाहर की कई जिम्मेदारियों को संभालने के बाद आज की युवा पीढ़ी घूमने को किसी 'टास्क' की तरह नहीं लेना चाहती। इसी वजह से 'नो-आइटिनरेरी' ट्रैवल यानी बिना प्लान वाली यात्रा लोकप्रिय हो रही है। किसी और के बनाए हुए ट्रैवल गाइड के आधार पर कम समय और कम खर्च में किसी जगह को देख लेना संभव तो है लेकिन उसमें अपने तरीके से किसी अनजानी जगह को खोजने का असली आनंद नहीं मिलता।

इसीलिए युवा पीढ़ी के लिए यात्रा का मतलब सिर्फ जगह देखना नहीं बल्कि 'कुछ नया महसूस करना' बन गया है। और यही वजह है कि 'नो-आइटिनरेरी वेकेशन' धीरे-धीरे आने वाले समय में घूमने का एक नया और अहम तरीका बनता जा रहा है।

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