मुंबई : वैश्विक शेयर बाजारों की रैंकिंग में भारत को एक और झटका लगा है। ताइवान के बाद अब दक्षिण कोरिया भी मार्केट कैपिटलाइजेशन के मामले में भारत से आगे निकल गया है। पिछले सप्ताह ताइवान ने भारत को पीछे छोड़ दिया था और अब दक्षिण कोरिया ने भी बढ़त हासिल कर ली है।
1 जून के आंकड़ों के अनुसार दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 5.04 ट्रिलियन डॉलर रहा, जबकि भारत का मार्केट कैपिटलाइजेशन 4.84 ट्रिलियन डॉलर दर्ज किया गया। वहीं ताइवान का मार्केट कैपिटलाइजेशन 5.15 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच चुका है। इस बदलाव के बाद मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर भारत का शेयर बाजार अब दुनिया में सातवें स्थान पर पहुंच गया है।
एशियाई बाजारों में यह स्थान परिवर्तन पिछले एक वर्ष के दौरान विभिन्न बाजारों में आए उतार-चढ़ाव का परिणाम माना जा रहा है। दक्षिण कोरिया का प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक कोस्पी (KOSPI) पिछले 52 सप्ताह में 110 प्रतिशत तक उछल गया है। दूसरी ओर ताइवान का प्रमुख बाजार सूचकांक इसी अवधि में 65 प्रतिशत बढ़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तेज उछाल के पीछे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और सेमीकंडक्टर क्षेत्र की मजबूत प्रगति सबसे बड़ा कारण है। ताइवान और दक्षिण कोरिया की प्रमुख तकनीकी कंपनियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विशेष रूप से TSMC, Samsung और SK Hynix जैसी कंपनियों के बेहतर वित्तीय प्रदर्शन ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।
ताइवान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन का कम से कम 60 प्रतिशत हिस्सा एआई और सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि इन दोनों देशों के बाजारों में पिछले एक वर्ष के दौरान तेज रफ्तार वृद्धि देखने को मिली है और उनका बाजार मूल्य तेजी से बढ़ा है।
इसके विपरीत भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता एक वर्ष बहुत उत्साहजनक नहीं रहा। वर्ष 2026 में अब तक सेंसेक्स में लगभग 12 प्रतिशत और निफ्टी में करीब 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर पूंजी निकासी भी भारतीय बाजार पर दबाव बना रही है।
विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का भी भारतीय शेयर बाजार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसके अलावा भारत के शेयर बाजार में एआई और सेमीकंडक्टर क्षेत्र की हिस्सेदारी अभी अपेक्षाकृत सीमित है। इसलिए इन क्षेत्रों में वैश्विक तेजी का लाभ भारतीय बाजार को उतनी मजबूती से नहीं मिल सका, जितना ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाजारों को मिला है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक भारत एआई, उन्नत प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को और मजबूत नहीं करता, तब तक वैश्विक मार्केट कैपिटलाइजेशन रैंकिंग में प्रतिस्पर्धा और चुनौतीपूर्ण बनी रह सकती है। फिलहाल दक्षिण कोरिया और ताइवान की तेज प्रगति के बीच भारत का शेयर बाजार सातवें स्थान पर खिसक गया है।