वॉशिंगटनः अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को अमेरिका का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और इसे जल्द पूरा किए जाने की उम्मीद है।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के समक्ष गवाही देते हुए रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच सहयोग के व्यापक अवसर मौजूद हैं तथा दोनों देश कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए वार्ताएं तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं और दोनों पक्ष इसे जल्द संपन्न करना चाहते हैं।
प्रमुख बिंदु
भारत को अमेरिका का महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी बताया।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता पूरा होने के करीब।
दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंध मजबूत करने पर जोर।
क्वाड सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए नए कार्यात्मक एजेंडे पर काम जारी।
इस वर्ष क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन की तैयारी जारी।
रुबियो ने बताया कि उनकी हालिया भारत यात्रा के दौरान दो प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया। पहला, व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना और दूसरा, द्विपक्षीय एवं क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत करना। उनके अनुसार समझौते को लेकर दोनों देशों की इच्छा सकारात्मक है।
इस बीच भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने अमेरिकी सहायक व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच के भारत दौरे का स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विजन के अनुरूप व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने की दिशा में प्रगति हो रही है।
रुबियो ने यह भी बताया कि भारत यात्रा के दौरान उन्होंने द्विपक्षीय बैठकों के अलावा क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया। उनके अनुसार क्वाड के तहत अब कई ऐसे ठोस कार्यक्षेत्र तय किए गए हैं जिन पर सदस्य देश मिलकर आगे बढ़ सकते हैं।
क्वाड बैठक से जुड़े प्रमुख निर्णय
महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की पहल।
ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने पर सहमति।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री निगरानी और सहयोग को विस्तार।
क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक साझेदारी पर फोकस।
विदेश मंत्री ने यह भी पुष्टि की कि इस वर्ष क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन के आयोजन पर काम चल रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि यह बैठक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में होने वाले किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के इतर आयोजित की जा सकती है, जिससे चारों देशों के नेताओं की मौजूदगी सुनिश्चित करना आसान होगा।