दुबई: कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मंगलवार को हुए ड्रोन हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि घटना में हवाई अड्डे की सुविधाओं और परिचालन ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी संदेश में भारतीय नागरिक की मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया। दूतावास ने कहा कि वह कुवैती अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और मृतक के परिवार तथा घायलों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इस घटना के बाद ईरान-अमेरिका तनाव के दौरान जान गंवाने वाले भारतीयों की संख्या बढ़कर कम से कम 10 हो गई है। इससे पहले 30 मार्च को कुवैत में एक बिजली और समुद्री जल शोधन संयंत्र पर हुए ईरानी हमले में भी एक भारतीय नागरिक की मृत्यु हुई थी।
कुवैत के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल नासिर बुसलीब ने बताया कि हवाई अड्डे के यात्री टर्मिनल-1 को कई शत्रुतापूर्ण ड्रोन ने निशाना बनाया। हमले में एक यात्री की मौत हुई और कई कर्मचारी तथा यात्री घायल हुए। साथ ही हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे को गंभीर क्षति पहुंची।
कुवैत समाचार एजेंसी के अनुसार, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के प्रवक्ता अब्दुल्ला अल-राजही ने बताया कि हमले के बाद बुधवार को हवाई यातायात अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया। कई उड़ानों को निकटवर्ती हवाई अड्डों की ओर मोड़ दिया गया है और अगली सूचना तक यह व्यवस्था जारी रहेगी।
स्वास्थ्य मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता डॉ. अब्दुल्ला अल-सुंद ने बताया कि अब तक सात अस्पतालों में कुल 63 घायलों को भर्ती कराया गया है। इनमें से सात लोगों की आपातकालीन बड़ी सर्जरी की गई है, जबकि कई अन्य का छोटे स्तर पर उपचार और ऑपरेशन किया गया। घायलों में आम नागरिक, हवाई अड्डा कर्मचारी और यात्री शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि पिछले महीने होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट एक भारतीय नाविक की उस समय मौत हो गई थी, जब उसकी पारंपरिक लकड़ी की नौका में आग लग गई थी। मार्च में संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में एक मिसाइल को रोकने के दौरान गिरे मलबे से एक भारतीय नागरिक की मौत और एक अन्य के घायल होने की खबर भी सामने आई थी।
इसके अलावा 18 मार्च को सऊदी अरब की राजधानी रियाद पर हुए मिसाइल और ड्रोन हमले में एक भारतीय नागरिक की जान गई थी। 13 मार्च को ओमान के एक औद्योगिक क्षेत्र पर हुए हमले में दो भारतीयों की मृत्यु हुई थी, जबकि संघर्ष के शुरुआती दिनों में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों में तीन भारतीय नाविकों की भी मौत हुई थी। एक भारतीय नागरिक अब भी लापता बताया जा रहा है।