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बंगाल की सियासत में इस्तीफों की झड़ी: फिरहाद हकीम ने छोड़ा मेयर पद, टीएमसी में बढ़ी हलचल

चुनावी झटकों और प्रशासनिक दबाव के बीच टीएमसी के भीतर नेतृत्व और नियंत्रण पर सवाल तेज, मेयर फिरहाद हकीम ने भी पद छोड़ा।

By श्वेता सिंह

Jun 03, 2026 19:13 IST

कोलकाताः कोलकाता की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से जिस तरह से इस्तीफों और असंतोष की एक श्रृंखला दिख रही थी, उसमें अब एक और बड़ा नाम जुड़ गया है-कोलकाता नगर निगम के मेयर फिरहाद हकीम। उन्होंने बुधवार, 3 जून को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह कदम अकेला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे टीएमसी के भीतर चल रहे बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी के भीतर पहले से ही कई स्तरों पर असंतोष और खींचतान की खबरें सामने आ रही थीं, जिनका असर अब प्रशासनिक ढांचे तक पहुंच गया है।

नतीजों के बाद बदलता शक्ति-संतुलन

2026 के विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ। तृणमूल कांग्रेस की सीटों में भारी गिरावट के बाद संगठनात्मक और प्रशासनिक स्तर पर अस्थिरता बढ़ गई। कोलकाता नगर निगम में भी राजनीतिक समीकरण बदलते दिखे, जहां कई वार्डों में विपक्षी बढ़त और भीतरखाने असंतोष ने कामकाज को प्रभावित किया। इसी माहौल में फिरहाद हकीम ने संकेत दिए थे कि मौजूदा परिस्थितियों में स्वतंत्र रूप से काम करना कठिन हो रहा है। उनका इस्तीफा उसी दबाव का परिणाम माना जा रहा है।

पार्टी के भीतर बढ़ता दबाव और नेतृत्व पर सवाल

सूत्रों के अनुसार, नगर निगम के कामकाज में लगातार प्रशासनिक जटिलताएं और निर्णय प्रक्रिया में बाधाएं सामने आ रही थीं। हाल के दिनों में कुछ विवादों और आंतरिक असहमति ने स्थिति को और जटिल बना दिया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय की कमी और अलग-अलग स्तरों पर बढ़ते मतभेदों ने प्रशासनिक कार्यों पर असर डाला। इसी बीच टीएमसी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने स्पष्ट किया कि फिरहाद हकीम ने पहले भी कई बार पद छोड़ने की इच्छा जताई थी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सहमति के बाद यह फैसला लिया गया।

आगे की राजनीति: नया मेयर और नई चुनौतियां

इस्तीफे के बाद अब कोलकाता नगर निगम में नए मेयर के चयन की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। हालांकि टीएमसी के पास अब भी निगम में बहुमत मौजूद है, लेकिन राजनीतिक माहौल बदलने के कारण प्रशासनिक संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा। पार्टी के भीतर चर्चा है कि नए नेतृत्व में ऐसे चेहरे को आगे लाया जा सकता है जो संगठन और प्रशासन दोनों को संभाल सके।

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