कोलकाताः पश्चिम बंगाल में बुधवार को अन्नपूर्णा योजना की औपचारिक शुरुआत की गई। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नबान्न से इस योजना का शुभारंभ करते हुए घोषणा की कि इसी दिन 28,25,769 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में पहली किश्त भेज दी जाएगी।
सरकारी जानकारी के अनुसार यह योजना पहले की लक्ष्मी भंडार योजना की जगह लागू की गई है और इसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से अधिक मजबूत बनाना है। सरकार ने इसे महिलाओं के लिए एक बड़ा सामाजिक और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम बताया है।
योजना की शुरुआत और पहली किश्त का वितरण
नबान्न से शुरू की गई इस योजना के तहत मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि 3 जून को ही लाभार्थी महिलाओं के खातों में राशि भेजी जा रही है। यह प्रक्रिया सीधे आधार-लिंक्ड बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से की जा रही है।
सरकार का दावा है कि यह कदम पारदर्शिता और तेजी से लाभ पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
योजना के प्रमुख लाभ और बदलाव
अन्नपूर्णा योजना के तहत 25 से 60 वर्ष की पात्र महिलाओं को हर महीने ₹3000 यानी सालाना ₹36,000 की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह राशि सीधे बैंक खातों में भेजी जाएगी।
इसके साथ ही राज्य सरकार ने महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा भी शुरू की है, जो 1 जून से लागू है।
लक्ष्मी भंडार योजना से तुलना
पहले लागू लक्ष्मी भंडार योजना के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को ₹1500 और अनुसूचित जाति/जनजाति की महिलाओं को ₹1700 प्रति माह मिलता था। नई योजना में इस राशि को दोगुना कर दिया गया है।
सरकारी अनुमान के अनुसार करीब 2 करोड़ महिलाएं इस योजना से लाभान्वित हो सकती हैं। यह योजना महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
पात्रता, आवेदन और सत्यापन प्रक्रिया
इस योजना का लाभ 25 से 60 वर्ष की स्थायी निवासी महिलाओं को मिलेगा, जिनका बैंक खाता आधार से लिंक होना अनिवार्य है। इसके अलावा मोबाइल नंबर भी जरूरी है। सरकारी या अर्धसरकारी नौकरी करने वाली महिलाएं, पेंशनधारक, आयकरदाता और शिक्षण संस्थानों में कार्यरत महिलाएं इस योजना के लिए पात्र नहीं होंगी।
सरकार के अनुसार करीब 30 लाख लाभार्थियों के नाम लक्ष्मी भंडार सूची से हटाए जा रहे हैं, जिनमें मृत व्यक्ति, पुरुष और अन्य अपात्र श्रेणियां शामिल हैं। नए फॉर्म के जरिए विस्तृत पारिवारिक और आर्थिक जानकारी ली जा रही है तथा 90 दिनों तक घर-घर सत्यापन किया जाएगा।
आवेदन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से किया जा सकता है। अधिकारी घर-घर जाकर फॉर्म भरवाने की प्रक्रिया भी कर रहे हैं, ताकि किसी भी तरह की बिचौलिया व्यवस्था से बचा जा सके। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।