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कागजों की सियासत में फंसी तृणमूल, अभिषेक बनर्जी तक पहुंचा मामला

CID ने तीन MLA के सिग्नेचर सैंपल लेने के लिए कोर्ट में अर्जी दी। 70 साइन का सच तलाश रही सीआईडी।

By श्वेता सिंह

Jun 03, 2026 10:47 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के कथित ‘मीटिंग रेजोल्यूशन बुक’ को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। यह मामला एक ऐसे दस्तावेज से जुड़ा है जिसमें 70 विधायकों के नाम, पते और हस्ताक्षर दर्ज होने का दावा किया गया है। दस्तावेज में नामों का क्रम 1 से 70 तक दर्ज है, जिसे लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, इस दस्तावेज के स्वरूप और प्रक्रिया को लेकर शुरुआती स्तर पर ही असमानताएं सामने आई हैं, जिससे इसकी प्रामाणिकता पर संदेह बढ़ गया है।

हस्ताक्षर और तारीख में अंतर पर उठे सवाल

विवाद तब और गहरा गया जब दस्तावेज में दर्ज तारीखों को लेकर विरोधाभास सामने आया। जानकारी के मुताबिक, 19 मई को कालीघाट में एक बैठक हुई थी, लेकिन विधानसभा में जो पत्र जमा किया गया उसमें 6 मई की तारीख दर्ज है।

इसके अलावा, दस्तावेज में हस्ताक्षरों की शैली भी अलग-अलग पाई गई है-कहीं पूरे नाम कैपिटल लेटर में, कहीं छोटे अक्षरों में और कुछ जगह संक्षिप्त हस्ताक्षर दर्ज हैं। कुछ विधायकों ने यह भी दावा किया है कि उन्होंने कथित तारीख पर ऐसे किसी रेजोल्यूशन पर साइन नहीं किए थे।

अभिषेक बनर्जी से पूछताछ की तैयारी

इस पूरे मामले की जांच अब राज्य की अपराध जांच शाखा (सीआईडी) कर रही है। जांच एजेंसी ने दस्तावेजों की वैधता और प्रक्रिया की जांच तेज कर दी है और अब तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद अभिषेक बनर्जी का बयान दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, उनका बयान 8 जून के आसपास दर्ज किया जा सकता है, क्योंकि विधानसभा में संबंधित पत्र उनके लेटरहेड पर जमा किया गया था।

इसके साथ ही सीआईडी ने तीन विधायकों-बाहारुल इस्लाम, शुभाशीष दास और अरूप रॉय- के हस्ताक्षर नमूने लेने के लिए बैंकशाल अदालत में आवेदन दिया है। मामले की फॉरेंसिक जांच भी जारी है, और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी

जांच के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने आरोप लगाया है कि कुछ मामलों में बैकडेट साइनिंग जैसी परंपरा देखने को मिल रही है। उन्होंने दावा किया कि कुछ विधायक उस दिन मौजूद ही नहीं थे और उनके नाम दस्तावेज में दर्ज पाए गए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि मोबाइल टावर लोकेशन की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल सीआईडी ने सभी संबंधित दस्तावेजों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। जांच एजेंसी का ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि क्या यह पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत हुई थी या इसमें किसी स्तर पर अनियमितता हुई है। इस जांच के परिणाम बंगाल की राजनीति में आगे और बड़े खुलासों की दिशा तय कर सकते हैं।

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