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आसाराम की अंतरिम जमानत खत्म, कोर्ट ने तथ्यों के साथ राहत देने से किया इनकार

कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश से भी सहमति जताई, जिसमें आसाराम को नरमी देने से मना किया गया था, और कहा: "उस समय अपीलकर्ता की उम्र 73 साल थी। अब वह 86 साल का है।

By लखन भारती

Jun 02, 2026 19:15 IST

जयपुरः नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने स्वास्थ्य कारणों के आधार पर दी गई उनकी अंतरिम जमानत को आगे बढ़ाने से इनकार करते हुए राहत समाप्त कर दी। करीब 2 साल से लगातार बढ़ाई जा रही अंतरिम जमानत पर अब रोक लगने के बाद आसाराम को फिर से न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा। राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता के अधिकारों और न्याय की भावना को प्रमुखता देते हुए कहा कि यौन अपराधों के मामलों में पीड़ित पक्ष की चिंताओं और उसके जीवन पर पड़े प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अदालत ने अपने आदेश में टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में न्याय केवल आरोपी के अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़िता के सम्मान, सुरक्षा और न्याय की अपेक्षाओं की भी रक्षा की जानी चाहिए।

पीड़िता की ओर से जमानत का विरोध

सुनवाई के दौरान आसाराम की ओर से बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देकर अंतरिम जमानत जारी रखने की मांग की गई थी। बचाव पक्ष का तर्क था कि 86 वर्षीय आसाराम विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त हैं और उन्हें चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता है। वहीं अभियोजन पक्ष और पीड़िता की ओर से इस मांग का विरोध किया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने राहत बढ़ाने की मांग अस्वीकार कर दी।

गौरतलब है कि यह मामला वर्ष 2013 का है। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा स्थित एक गुरुकुल में पढ़ने वाली नाबालिग छात्रा ने आरोप लगाया था कि जोधपुर के निकट स्थित आश्रम में उसके साथ यौन शोषण किया गया। शिकायत के बाद पुलिस ने पोक्सो एक्ट और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी

कोर्ट ने कहा पीड़िता को नजरअंदाज नहीं कर सकता

कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश से भी सहमति जताई, जिसमें आसाराम को किसी भी तरह की नरमी देने से मना किया गया था, और कहा: "उस समय अपीलकर्ता की उम्र 73 साल थी। अब वह 86 साल का है। इस तरह वह हमारे सामने उम्र के बोझ से झुका हुआ और बीमारियों से घिरा हुआ है। वह नरमी बरतने की अपनी गुहार पर एक बार फिर से विचार करने की विनती कर रहा है। हमने उसकी गुहार पर विचार किया और अपना दिमाग लगाया। हम उसे किसी भी तरह की रियायत नहीं दे सकते, क्योंकि उसकी शारीरिक कमज़ोरी की आड़ में पीड़िता की आवाज़ को नज़रअंदाज़ करना सही नहीं ठहराया जा सकता।

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