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विधानसभा में तृणमूल की राजनीति गरमाई, ऋतब्रत-सन्दीपन की एंट्री से बढ़ा सियासी तनाव

विपक्ष के नेता चयन और बैठक में तृणमूल विधायकों की अलग-अलग प्रतिक्रिया, स्पीकर को दिए गए पत्र पर भी विवाद।

कोलकाताः पश्चिम बंगाल विधानसभा में बुधवार सुबह राजनीतिक गतिविधियां अचानक तेज हो गईं, जब तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी और सन्दीपन साहा विधानसभा परिसर में पहुंचे। उनके पहुंचने के कुछ ही समय बाद तृणमूल कांग्रेस के अन्य विधायक भी एक-एक कर विधानसभा में नजर आए, जिससे पूरे परिसर में हलचल बढ़ गई।

सूत्रों के अनुसार, ऋतब्रत बनर्जी के पास पार्टी विधायकों के हस्ताक्षर से संबंधित एक पत्र होने का दावा किया गया है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि इस कथित दस्तावेज में कितने विधायकों के हस्ताक्षर शामिल हैं।

विधानसभा में प्रवेश के दौरान सन्दीपन साहा ने दावा किया कि उनके पास दो-तिहाई से अधिक तृणमूल विधायकों के साथ बैठक का समर्थन है। वहीं अन्य विधायकों ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी। कुछ ने इसे सामान्य उपस्थिति बताया, जबकि कुछ ने कहा कि वे केवल व्यक्तिगत कारणों से आए हैं। कई विधायकों ने इस पूरे घटनाक्रम पर तत्काल टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि स्थिति थोड़ी देर में स्पष्ट हो जाएगी।

विधानसभा पहुंचे विधायकों में पूर्व मंत्री साबिना यास्मीन, जावेद खान, रथीन घोष और चंद्रनाथ सिन्हा भी शामिल रहे। परिसर में राजनीतिक बयानबाजी उस समय और तेज हो गई जब कुछ नेताओं ने दावा किया कि विरोधी दल के नेता के चयन को लेकर बैठक आयोजित की जा रही है।

साबिना यास्मीन ने कहा कि आज बैठक में विपक्ष के नेता के चयन पर चर्चा होगी। वहीं चंद्रनाथ सिन्हा ने यह भी कहा कि ऋतब्रत बनर्जी को उन्होंने विपक्षी दल के नेता के रूप में स्वीकार किया है। हालांकि, इस बैठक को लेकर आधिकारिक तौर पर किसी एक पक्ष की पुष्टि सामने नहीं आई है।

इससे एक दिन पहले भी तृणमूल कांग्रेस की ओर से विधानसभा स्पीकर रथीन्द्रनाथ बसु को एक पत्र भेजा गया था, जिसमें वरिष्ठ विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्षी दल का नेता, फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक तथा नयन बंधोपाध्याय और असीमा पात्र को उप-नेता बनाए जाने की मांग की गई थी। लेकिन स्पीकर के शहर में मौजूद न होने के कारण यह पत्र विधानसभा में स्वीकार नहीं किया गया, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया।

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए असिमा पात्र सहित कई नेताओं ने नाराजगी जताई और कहा कि स्पीकर की अनुपस्थिति के कारण पत्र स्वीकार न होना उचित नहीं है। उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी पर भी तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘विद्रोही और विश्वासघाती’ बताया।

फिलहाल विधानसभा परिसर में स्थिति अस्थिर बनी हुई है और विभिन्न नेताओं के बयानों से राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है।

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