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बाघिन ने बढ़ाई राज्य की ‘टाइगर फैमिली’, वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को मिली बड़ी सफलता

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने दी जानकारी, मां और शावकों की सुरक्षा के लिए वन विभाग की विशेष निगरानी जारी।

By श्वेता सिंह

Jun 03, 2026 11:09 IST

भुवनेश्वरः ओडिशा के सिमिलीपाल टाइगर रिजर्व से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में अच्छी खबर सामने आई है। महाराष्ट्र के ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व से स्थानांतरित की गई बाघिन ‘जीनत’ ने चार शावकों को जन्म दिया है। राज्य सरकार ने इसे जैव विविधता संरक्षण और बाघों की संख्या बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस जानकारी को साझा करते हुए कहा कि सिमिलीपाल के अनुकूल वातावरण में जीनत द्वारा चार शावकों को जन्म देना राज्य के लिए गर्व का विषय है। उनके अनुसार, यह घटना न केवल बाघों की आबादी में वृद्धि का संकेत है, बल्कि वन्यजीवों के लिए सुरक्षित और मजबूत आवास विकसित करने की प्रशासनिक कोशिशों की सफलता भी दर्शाती है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वन विभाग ने बाघिन और उसके शावकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी प्रकार का खतरा उत्पन्न न हो।

उन्होंने वनकर्मियों की सतर्कता और संरक्षण नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि ओडिशा आज वन्यजीवों के लिए एक सुरक्षित आश्रयस्थल के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। राज्य सरकार भविष्य में भी सिमिलीपाल के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने और वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रमों को और सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

इस उपलब्धि का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसी वर्ष अप्रैल में एक दुर्लभ घटना सामने आई थी, जब एक युवा नर रॉयल बंगाल टाइगर करीब 800 किलोमीटर का सफर तय कर सिमिलीपाल टाइगर रिजर्व पहुंचा था। वन अधिकारियों ने इसे असाधारण और बेहद दुर्लभ घटना बताया था।

करीब चार से पांच वर्ष आयु के उस वयस्क बाघ की मौजूदगी अखिल भारतीय बाघ गणना के दौरान लगाए गए कैमरा ट्रैप में दर्ज हुई थी। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की लंबी दूरी की आवाजाही जंगलों के बीच बेहतर संपर्क, पर्याप्त शिकार और नए क्षेत्र की तलाश की प्राकृतिक प्रवृत्ति को दर्शाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जीनत द्वारा चार शावकों को जन्म देना और हाल में नर बाघ का सिमिलीपाल तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि ओडिशा के वन क्षेत्र बाघों के लिए अनुकूल और सुरक्षित आवास के रूप में विकसित हो रहे हैं।

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