कोलकाताः तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में अपने सभी संगठनात्मक ढांचे को भंग कर दिया है। इसमें जिला स्तर की कमेटियां, ब्लॉक संगठन और छात्र, युवा, महिला, श्रमिक और किसान जैसे सभी फ्रंटल संगठन शामिल हैं।
पार्टी ने कहा है कि यह कदम संगठन को दोबारा मजबूत बनाने और पूरी तरह से समीक्षा करने के लिए उठाया गया है। अब नए सिरे से संगठन तैयार किया जाएगा। हालांकि राजनीतिक हलकों में इसे सिर्फ पुनर्गठन नहीं, बल्कि पार्टी के अंदर चल रहे संकट का संकेत माना जा रहा है।
चुनावी हार से बिगड़ी स्थिति
2026 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को बड़ा नुकसान हुआ। पार्टी 215 सीटों से घटकर सिर्फ 80 सीटों पर आ गई, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने 208 सीटों के साथ सरकार बना ली।
इस चुनाव में ममता बनर्जी को भी भवानीपुर सीट से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद पार्टी के अंदर सवाल उठने लगे कि नेतृत्व और रणनीति में कहां गलती हुई।
After careful consideration, it has been decided that all committees of the All India Trinamool Congress in West Bengal, as well as all its frontal organisations, shall stand dissolved with immediate effect.
— All India Trinamool Congress (@AITCofficial) June 3, 2026
The party will undertake a comprehensive exercise of introspection,
पार्टी में बगावत और विवाद
पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि उनके साथ 58 से 59 विधायक हैं। वे खुद को “असली तृणमूल” का नेता बता रहे हैं और विधानसभा में विपक्ष के नेता बनने की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने 3 जून को स्पीकर रथिंद्रनाथ बोस को 58 विधायकों के समर्थन वाला पत्र भी दिया। इसमें अखरुज्जमान को चीफ व्हिप बनाने की बात भी शामिल है। लेकिन कुछ विधायकों ने बाद में कहा कि हस्ताक्षर को लेकर सवाल हैं, जिससे मामला और उलझ गया है।
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कमजोर होती पकड़ और आगे की चुनौती
हाल के दिनों में पार्टी की बैठकों में नेताओं की उपस्थिति भी कम रही है। कई महत्वपूर्ण बैठकों में बड़ी संख्या में विधायक शामिल नहीं हुए। इससे साफ दिखता है कि संगठन के भीतर तालमेल कमजोर हो रहा है।
अब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह इस टूट और असंतोष को कैसे संभाले और अपने संगठन को फिर से कैसे मजबूत करे। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह पुनर्गठन सफल नहीं हुआ, तो पार्टी में और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
तृणमूल कांग्रेस इस समय एक मुश्किल दौर से गुजर रही है। संगठन भंग करने का फैसला जहां एक तरफ सुधार की कोशिश दिखाता है, वहीं दूसरी तरफ यह पार्टी के अंदर गहरे संकट को भी उजागर करता है।