🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

शुभेंदु अधिकारी की बैठक में जुटे तृणमूल के दिग्गज नेता, क्या बंगाल में बदल रहे हैं समीकरण?

कुणाल घोष, फिरहाद हाकिम, नयना बंद्योपाध्याय समेत करीब 20 नेताओं की मौजूदगी ने बढ़ाई राजनीतिक अटकलें।

By श्वेता सिंह

Jun 03, 2026 16:12 IST

कोलकाताः मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में नबान्न में आयोजित प्रशासनिक समीक्षा बैठक उस समय राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गई, जब इसमें तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और विधायक बड़ी संख्या में शामिल हो गए। बैठक का उद्देश्य कोलकाता, हावड़ा और दक्षिण 24 परगना जिलों के प्रशासनिक कार्यों की समीक्षा करना था, लेकिन इसमें विपक्षी खेमे के नेताओं की उपस्थिति ने इसे एक राजनीतिक संकेतक बना दिया।

करीब 20 से अधिक तृणमूल विधायक और वरिष्ठ नेता इस बैठक में शामिल हुए। इनमें कुणाल घोष, फिरहाद हाकिम, नयना बंद्योपाध्याय, जावेद खान, अशोक देव, अरुणाभ सेन, समीर पांजा, प्रिया पाल, गुलशन मलिक, तापस माइती, नीलिमा मिस्त्री, अब्दुल खालेक मोल्ला, बहारुल इस्लाम, परशुराम दास, जयदेव हलदार, समीर जेना, शुभाशीष दास और अकरुज्जामान जैसे प्रमुख नाम शामिल रहे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में विपक्षी खेमे के नेताओं की एक प्रशासनिक बैठक में मौजूदगी सामान्य घटना नहीं है, बल्कि यह राज्य की राजनीतिक संरचना में चल रहे बदलावों का संकेत है।

निष्कासित नेताओं की एंट्री और संगठनात्मक तनाव

बैठक का सबसे विवादास्पद पहलू ऋतब्रत बंद्योपाध्याय और संदीपन साहा की मौजूदगी रही। दोनों नेताओं को हाल ही में पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित किया गया था, लेकिन इसके बावजूद उनका नबान्न पहुंचना संगठनात्मक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सूत्रों के अनुसार, विधानसभा में विपक्ष के नेतृत्व को लेकर जो आंतरिक विवाद चला और आखिर में ऋतब्रत बंद्योपाध्याय को ही विपक्ष का नेता नामित किया गया। दावा किया जा रहा है कि उन्हें लगभग 58 विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जो कि दो-तिहाई बहुमत के करीब माना जा रहा है।

संदीपन साहा को उपनेता पद के लिए प्रस्तावित किए जाने की चर्चा भी राजनीतिक हलकों में चल रही है। यह घटनाक्रम बताता है कि पार्टी के भीतर अनुशासन और नेतृत्व को लेकर असहमति अब खुले मंच पर दिखाई देने लगी है।

नेतृत्व संघर्ष और तृणमूल की आंतरिक राजनीति

तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा यह घटनाक्रम केवल व्यक्तियों का विवाद नहीं, बल्कि संगठनात्मक नेतृत्व की दिशा पर बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। एक ओर पार्टी नेतृत्व द्वारा वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्षी नेता के रूप में आगे बढ़ाने की कोशिश की गई, वहीं दूसरी ओर एक बड़ा समूह ऋतब्रत बंद्योपाध्याय के समर्थन में खड़ा दिखाई दे रहा है।

स्पीकर को सौंपे गए पत्र में 58 विधायकों के हस्ताक्षर होने की बात सामने आने के बाद स्थिति और जटिल हो गई है। यह संख्या दो-तिहाई बहुमत की सीमा को छूती है, जिससे विधानसभा में विपक्षी नेतृत्व की आधिकारिक स्थिति को लेकर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बहस शुरू हो गई है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल पदों का नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर नियंत्रण, निर्णय प्रक्रिया और भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर गहरे मतभेदों का संकेत है।

बंगाल की राजनीति में बदलते समीकरण और भविष्य की दिशा

नबान्न की इस बैठक को अब केवल एक प्रशासनिक समीक्षा नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीति में संभावित नए समीकरणों की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। नेताओं की उपस्थिति और संगठनात्मक विवादों के बीच यह स्पष्ट हो रहा है कि तृणमूल कांग्रेस एक संक्रमणकालीन दौर से गुजर रही है।

दूसरी ओर राज्य सरकार प्रशासनिक सुधारों और अन्नपूर्णा योजना जैसी कल्याणकारी पहलों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे जनता के बीच सरकार की छवि को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि विपक्षी खेमे में यह अस्थिरता जारी रहती है, तो आने वाले समय में विधानसभा के भीतर शक्ति संतुलन और भी जटिल हो सकता है। वहीं, स्पीकर का अंतिम निर्णय यह तय करेगा कि विपक्ष का आधिकारिक चेहरा कौन होगा।

फिलहाल सभी की नजरें विधानसभा अध्यक्ष के आगामी निर्णय पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि विपक्ष का आधिकारिक चेहरा कौन होगा। यही फैसला आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीतिक दिशा को भी प्रभावित कर सकता है।

Articles you may like: