कोलकाता : फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी से जुड़े विवाद में पूर्व खेल मंत्री अरुप विश्वास के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद उन पर राजनीतिक और सार्वजनिक दबाव और बढ़ गया है। अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के छोटे भाई तथा खेल जगत में ‘बाबुन’ नाम से चर्चित स्वपन बंद्योपाध्याय ने अरुप विश्वास पर सीधे तौर पर “थ्रेट कल्चर” यानी डर और दबाव की राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।
मंगलवार को फोन पर बातचीत के दौरान स्वपन बंद्योपाध्याय ने दावा किया कि उन्हें एक समय भारतीय जनता पार्टी की ओर से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उन्होंने वह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा, “मेरे पास भाजपा की ओर से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव था। लेकिन अगर मैं वह टिकट ले लेता, तो शायद आज जीवित नहीं रहता। उस समय माहौल ऐसा बना दिया गया था।”
स्वपन बंद्योपाध्याय ने अरुप विश्वास पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व खेल मंत्री उनसे डरते थे। उनके अनुसार, अरुप विश्वास को आशंका थी कि यदि वह विधायक बन गए, तो भविष्य में खेल मंत्री भी बन सकते हैं। पूर्व खेल मंत्री मुझसे भयभीत रहते थे। उन्हें लगता था कि यदि मैं विधायक बन गया, तो खेल मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल सकता हूं। उन्होंने खेल जगत में थ्रेट कल्चर की शुरुआत की थी। बंगाल ओलंपिक संघ के चुनाव के दौरान अरुप विश्वास ने खुले तौर पर निर्देश दिया था कि मुझे वोट न दिया जाए।
स्वपन ने आगे आरोप लगाया कि विभिन्न जिला खेल संघों को यह संदेश दिया गया था कि यदि वे उन्हें वोट देंगे, तो राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली पांच लाख रुपये की वित्तीय सहायता बंद कर दी जाएगी। जिला संघों से कहा गया था कि यदि वे मुझे वोट देंगे, तो सरकार की ओर से मिलने वाली पांच लाख रुपये की सहायता राशि नहीं मिलेगी। उन्होंने मेरा बहुत बड़ा नुकसान किया है।
मेसी से जुड़े विवाद को लेकर भी स्वपन बंद्योपाध्याय ने अरुप विश्वास की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा, “जिस तरह उस दिन मेसी को पकड़कर घुमाया जा रहा था, उसे देखकर ऐसा लग रहा था मानो वह विश्व प्रसिद्ध फुटबॉलर नहीं, बल्कि पड़ोस का कोई परिचित व्यक्ति हो।
स्वपन बंद्योपाध्याय और ममता बनर्जी के संबंध भी अतीत में काफी चर्चा में रहे हैं। एक समय ऐसा भी आया था जब ममता बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से यह घोषणा कर दी थी कि उनका अपने भाई से कोई संबंध नहीं है।
इस संदर्भ में स्वपन ने कहा, “नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी मेरे बड़े भाई जैसे हैं। वह मुझे बहुत स्नेह करते हैं। लेकिन मैं उस स्नेह का सम्मान नहीं कर सका, क्योंकि मेरे परिवार की ओर से बहुत अधिक बाधाएं थीं। मुझ पर भारी दबाव बनाया गया था।”
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया लेने के लिए अरुप विश्वास से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इसलिए उनके पक्ष की प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी है।