नॉर्वे : भारत के युवा ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंदा ने नॉर्वे चेस टूर्नामेंट में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए दुनिया के नंबर-1 शतरंज खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को आठवें राउंड में पराजित कर दिया। महज 20 वर्ष की उम्र में प्रज्ञानानंदा ने यह साबित कर दिया कि वह विश्व शतरंज के सबसे बड़े मंच पर किसी भी दिग्गज को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं।
यह इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में कार्लसन के खिलाफ उनकी दूसरी जीत रही। इससे पहले 28 मई को भी प्रज्ञानानंदा ने सफेद मोहरों से खेलते हुए कार्लसन को मात दी थी। अब 2 जून को खेले गए मुकाबले में उन्होंने काले मोहरों के साथ शानदार रणनीति और धैर्य का परिचय देते हुए नॉर्वे के स्टार खिलाड़ी को फिर से पराजित कर दिया।
इस जीत के साथ प्रज्ञानानंदा भारतीय शतरंज इतिहास में एक विशेष उपलब्धि हासिल करने वाले दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं। वह दूसरे भारतीय हैं जिन्होंने एक ही टूर्नामेंट में मैग्नस कार्लसन को दो बार हराने का कारनामा किया है।
इससे पहले यह उपलब्धि भारत के महान शतरंज खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद ने हासिल की थी। वर्ष 2007 में लिनारेस इंटरनेशनल टूर्नामेंट के दौरान आनंद ने कार्लसन को लगातार दो मुकाबलों में शिकस्त दी थी। लगभग दो दशक बाद प्रज्ञानानंदा ने उसी उपलब्धि को दोहराकर भारतीय शतरंज की नई पीढ़ी की ताकत का परिचय दिया है।
नॉर्वे चेस में मिली इस जीत ने न केवल प्रज्ञानानंदा की स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि भारतीय खिलाड़ी अब विश्व शतरंज के शीर्ष खिलाड़ियों के लिए लगातार चुनौती बनते जा रहे हैं। लगातार दो बार कार्लसन को हराना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है, क्योंकि कार्लसन लंबे समय से विश्व शतरंज के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में गिने जाते हैं।
प्रज्ञानानंदा का यह प्रदर्शन भारतीय शतरंज के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है और इससे आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में उनके प्रति उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं।