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पुराने वाहनों पर केंद्र की बड़ी कार्रवाई, दिल्ली-एनसीआर में चलेगा क्लीन ट्रांसपोर्ट अभियान

केंद्र सरकार पुराने ट्रक और बसों को बीएस-6 व इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने के लिए देगी प्रोत्साहन, 1.91 लाख ट्रक और 16 हजार से अधिक बसें होंगी शामिल।

By डॉ. अभिज्ञात

Jun 03, 2026 16:55 IST

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने पुराने ट्रकों और बसों को बदलने के लिए 9,585 करोड़ रुपये की नई योजना को मंजूरी दी है। बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत इस योजना का वित्तपोषण आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) करेगा। वहीं, इसका क्रियान्वयन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के माध्यम से किया जाएगा।

योजना के तहत दिल्ली-एनसीआर में पंजीकृत लगभग 1.91 लाख ट्रकों और 16,329 बसों को लक्षित किया गया है। इसे दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों तथा केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन के सहयोग से लागू किया जाएगा।

सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार इस पहल का उद्देश्य बीएस-4 अथवा उससे पुराने उत्सर्जन मानकों वाले ट्रक और बस मालिकों को प्रोत्साहित करना है ताकि वे अपने वाहनों को बीएस-6 या उससे अधिक कठोर मानकों वाले वाहनों अथवा इलेक्ट्रिक वाहनों से बदल सकें।

योजना की कुल लागत 9,585 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इसमें केंद्र सरकार का योगदान 5,041 करोड़ रुपये होगा, जबकि सहभागी राज्य लगभग 1,601 करोड़ रुपये की कर रियायतें प्रदान करेंगे।

सरकार का मानना है कि स्वच्छ परिवहन तकनीकों को तेजी से अपनाने से वाहनजनित प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आएगी और दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता में सुधार होगा।

ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) और द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में परिवहन क्षेत्र का योगदान पीएम 2.5 प्रदूषण में 14 प्रतिशत, कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन में 40 प्रतिशत और नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन में 63 प्रतिशत है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुल वाहन बेड़े का केवल 3 प्रतिशत होने के बावजूद ट्रक और बसें पीएम 2.5 उत्सर्जन में 36 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती हैं।

योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार वाहन खरीद के लिए लिए गए ऋण पर पांच वर्षों तक 5 प्रतिशत ब्याज सहायता देगी। इसके अलावा वाहन श्रेणी के आधार पर प्रति माह अधिकतम 4,800 रुपये तक के ईंधन वाउचर और इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने या डिपॉजिट प्रमाणपत्र के व्यापार पर एकमुश्त लाभ भी प्रदान किए जाएंगे।

दूसरी ओर राज्य सरकारें नए वाहनों के लिए पंजीकरण शुल्क माफ करेंगी और मोटर वाहन कर में 10 वर्षों तक नए वाहनों पर 100 प्रतिशत तथा प्रयुक्त वाहनों पर 50 प्रतिशत तक की छूट देंगी। योजना में शामिल पुराने वाहनों पर बकाया देनदारियां भी समाप्त की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, सहभागी वाहन निर्माता कंपनियां एक्स-शोरूम कीमतों पर 8 प्रतिशत तक की छूट उपलब्ध कराएंगी।

पूरी प्रक्रिया एकीकृत डिजिटल पोर्टल के माध्यम से संचालित होगी। इस पोर्टल पर पात्रता की तत्काल जांच, ब्याज सहायता दावों का स्वचालित निपटान, मासिक ईंधन वाउचर का क्रेडिट और प्रदूषण में कमी की निगरानी की व्यवस्था होगी। नए वाहन के पंजीकरण की तिथि से केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाले लाभ पांच वर्षों तक जारी रहेंगे, जिससे दो वर्ष की नामांकन अवधि के बाद भी योजना का प्रभाव बना रहेगा।

सरकार के अनुसार प्री-बीएस श्रेणी का एक भारी वाहन लगभग 14 बीएस-6 वाहनों के बराबर प्रदूषण फैलाता है। वहीं, बीएस-4 वाहन भी बीएस-6 वाहन की तुलना में लगभग 2.7 गुना अधिक उत्सर्जन करते हैं। इसलिए नए वाहनों के उपयोग से प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।

योजना में बीएस-3 अथवा उससे पुराने वाहनों को अधिकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्रों पर नष्ट करना अनिवार्य किया गया है। जबकि बीएस-4 वाहनों को स्क्रैप करने या एनसीआर के बाहर गैर-एनसीएपी शहरों एवं कस्बों में बेचने का विकल्प दिया गया है।

वाहन मालिकों को इसके बाद एनसीआर के भीतर बीएस-6 या उससे उच्च मानक वाले अथवा इलेक्ट्रिक वाहन खरीदकर पंजीकृत कराने होंगे। दिल्ली के लिए विशेष प्रावधान के तहत योजना में खरीदे जाने वाले हल्के मालवाहक वाहन केवल इलेक्ट्रिक होंगे, जबकि बसें केवल बीएस-6 सीएनजी या इलेक्ट्रिक श्रेणी की ही स्वीकार की जाएंगी। सरकारी वाहनों को इस योजना के दायरे से बाहर रखा गया है।

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