🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

विद्यासागर विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह का आयोजन

दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने कहा-विश्वविद्यालय उच्चशिक्षा,नवाचार,शोध और नागरिक निर्माण का केंद्र होता है

By लखन भारती

Jun 03, 2026 21:55 IST

मिदनापुर: पश्चिम बंगाल के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में से एक, विद्यासागर विश्वविद्यालय ने भव्य विवेकानंद सभागृह में अपना ऐतिहासिक 23वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया। यह समारोह रिकॉर्ड 89,158 उपाधियाँ प्रदान करने के लिए याद किया जाएगा। विशेष रूप से अधिकांश स्नातक डिग्री धारण करने वाले भारत के इस वन-समृद्ध, ग्रामीण पहाड़ी क्षेत्र के हाशिए पर रहने वाले और आर्थिक रूप से वंचित वर्गों से आते हैं। 2023, 2024 और 2025 शैक्षणिक वर्षों में हजारों स्नातकों, स्नातकोत्तरों और डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने वालों के जश्न के साथ इस दीक्षांत समारोह ने विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। ​​इसने हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लिए सुलभ, समावेशी उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए संस्थान की निरंतर प्रतिबद्धता को उजागर किया। पुरस्कार पाने वालों में 193 स्नातक पदक विजेता, 181 स्नातकोत्तर पदक विजेता, 41 अनुदान पदक विजेता, 41 छात्रवृत्ति/पुरस्कार प्राप्तकर्ता, 1 एन.एस.एस. पुरस्कार विजेता और 2 प्रोफेसर शामिल थे जिन्हें अनुसंधान उत्कृष्टता के लिए क्रमशः विवेकानंद मेमोरियल रिसर्च अवार्ड और विद्यासागर मेमोरियल रिसर्च अवार्ड प्राप्त हुए। विश्वविद्यालय का ध्वज फहराने के बाद कार्यक्रम के अध्यक्ष पश्चिम बंगाल के माननीय राज्यपाल व विद्यासागर विश्वविद्यालय के माननीय कुलाधिपति आर. एन. रवि, विद्यासागर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रोफेसर दीपक कुमार कर के साथ खचाखच भरे सभागार में प्रवेश किए। इस अवसर पर कला एवं वाणिज्य संकाय के डीन प्रोफेसर (डॉ.) अरिंदम गुप्ता, विज्ञान संकाय के डीन प्रोफेसर (डॉ.) परेश चंद्र जाना और विद्यासागर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. जयंत किशोर नंदी के नेतृत्व में शैक्षणिक जुलूस में दीक्षांत परिधान में कोर्ट मेंबर्स भी शामिल हुए। रवींद्रनाथ टैगोर के प्रसिद्ध गीत "विश्वविद्या तीर्थप्रांगन कोरो महाज्ज्वल" को सुनते हुए कुलाधिपति ने मंच के दोनों ओर खड़े श्रोताओं का अभिवादन किया। 23वें दीक्षांत समारोह का शुभारंभ राष्ट्रगान "वंदे मातरम" और राष्ट्रगान "जन गण मन" के गायन से हुआ, जिसके बाद कुलाधिपति ने औपचारिक रूप से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उपस्थित लोगों ने कुलपति के भावपूर्ण भाषण को ध्यानपूर्वक सुना, जिन्होंने सभी का हार्दिक स्वागत किया और विद्यासागर विश्वविद्यालय की प्रमुख उपलब्धियों और योगदानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विश्वविद्यालय की इस प्रतिबद्धता का उल्लेख किया कि वह समाज के स्थानीय वंचित वर्गों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराएगा और साथ ही अनुसंधान, विस्तार और परामर्श के क्षेत्र में वैश्विक उत्कृष्टता और नेतृत्व के 'नए भारत' के लक्ष्य के साथ जुड़ा रहेगा। माननीय कुलपति द्वारा परिचय दिए जाने पर, अतिथि वक्ता प्रोफेसर (डॉ.) अनुपम बसु, जादवपुर विश्वविद्यालय के राजा रामन्ना चेयर प्रोफेसर, वर्तमान में सिस्टर निवेदिता विश्वविद्यालय, कोलकाता के माननीय कुलपति और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दुर्गापुर के पूर्व निदेशक अनुपम बसु ने अपने दीक्षांत भाषण में कहा कि हम बहुत ही गर्व के साथ यह कह सकते हैं कि हम उस विश्वविद्यालय से संबंध रखते हैं जिसकी नींव पंडित ईश्वरचंद्र विद्यासागर की स्मृति में रखा गया। एक ऐसे महान चरित्र जो 19वीं सदी में बंगाल की सड़कों को पारम्परिक धोती और क्रांतिकारी विचारों को लेकर चले। हमें यह याद रखना होगा कि ईश्वरचंद्र विद्यासागर शिक्षा और महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ते रहें। रवीन्द्रनाथ टैगोर ने मन और विचारों को भयमुक्त और स्वतंत्र होने पर जोर दिया। आज आपके पास 21वीं सदी के साधन हैं, लेकिन आपको 19वीं सदी के सुधारकों जैसा हृदय भी अपने साथ रखना होगा।

माननीय कुलपति द्वारा मानद डी.एससी. और डी.लिट. उपाधियों के प्राप्तकर्ताओं को कुलाधिपति के समक्ष प्रस्तुत किए जाने पर पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कुलाधिपति ने विधिवत रूप से डॉ. एस. सोमनाथ (जो आभासी रूप से जुड़े थे), पूर्व अध्यक्ष, इसरो, और डॉ. देबीप्रसाद दुआरी, पूर्व निदेशक, एम. पी. बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च, एम. पी. बिड़ला प्लैनेटेरियम, कोलकाता को मानद डी.एससी. की उपाधि प्रदान की और प्रोफेसर (डॉ.) बशाबी फ्रेजर, अंग्रेजी और रचनात्मक लेखन की प्रोफेसर एमेरिटा, एडिनबर्ग नेपियर विश्वविद्यालय, स्कॉटलैंड को मानद डी.लिट. की उपाधि प्रदान की। इसके बाद विवेकानंद सभागृह ने माननीय कुलाधिपति द्वारा दिए गए एक यादगार भाषण को सुना, जिसमें उन्होंने ईश्वर चंद्र विद्यासागर जैसे भारत के निर्माताओं के अमर योगदान पर जोर देते हुए कहा कि पूरे भारत में बंगाल ऐसी भूमि रही है जहाँ पुनर्जागरण की शुरुआत सबसे पहले हुई। पंडित ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने अपना पूरा जीवन शिक्षा व समाज सुधार के लिए समर्पित किया। ऐसे युगपुरुष का जीवन और उनके द्वारा किए गए कार्यों को अनिवार्य रूप से हर छात्र-छात्राओं को पढ़ना और उन पर गंभीर शोध अध्ययन भी होना चाहिए। दीक्षांत छात्र-छात्राओं और शोधार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा जीवन में कुछ नया और बड़ा करने के लिए साहस के साथ बड़े सपना भी देखना जरूरी है। आप विश्वविद्यालय के परिवार के साथ-साथ भारत के नागरिक भी हैं। अपने राष्ट्र की उन्नति तभी संभव है जब भारत के नागरिक होने के नाते हम अपने कर्तव्यों का भली-भांति पालन करें। राज्यपाल ने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर विकसित 2047 का लक्ष्य लेकर चलना है।कुलसचिव द्वारा अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर रमेश चंद्र दास और सूक्ष्म जीव विज्ञान विभाग के प्रोफेसर केशव चंद्र मंडल के नाम पुकारे जाने पर पूरे हॉल में एक बार फिर जोरदार तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी। ये दोनों क्रमशः प्रतिष्ठित विवेकानंद मेमोरियल रिसर्च अवार्ड और विद्यासागर मेमोरियल रिसर्च अवार्ड के प्राप्तकर्ता थे। यह भी घोषणा की गई कि अनुपस्थित रहने वाले विभिन्न डिग्री, प्रमाण पत्र, पुरस्कार और सम्मान के प्राप्तकर्ता भी अपनी डिग्री अनुपस्थिति में प्राप्त कर सकते हैं। इसके बाद माननीय कुलाधिपति ने 23वें दीक्षांत समारोह के समापन की घोषणा की। यह उल्लेखनीय है कि कार्यक्रम के अंत तक सभागार लगभग भरा हुआ था और सभी स्वतः ही राष्ट्रीय गीत गाने के लिए खड़े हो गए, जिसके बाद राष्ट्रगान ने कार्यक्रम के समापन को उपयुक्त रूप से चिह्नित किया।

इस कार्यक्रम की शोभा कई प्रतिष्ठित शैक्षणिक और प्रशासनिक हस्तियों ने बढ़ाई, जिनमें विद्यासागर विश्वविद्यालय के दो पूर्व कुलपति, प्रो. मनोरंजन माइती, प्रोफेसर सुशांत कुमार चक्रवर्ती और विद्यासागर विश्वविद्यालय के दो प्रोफेसर जो अब माननीय कुलपति हैं, प्रो. अमिय कुमार पांडा, रानी रासमणि ग्रीन यूनिवर्सिटी की कुलपति, प्रो. चंद्रदीपा घोष, झाड़ग्राम के साधु रामचंद मुर्मू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रमुख हैं। दीक्षांत समारोह की शोभा बढ़ाने वाले अन्य माननीय कुलपति कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रो. आशुतोष घोष, पश्चिम बंगाल राज्य विश्वविद्यालय के प्रो. अयान भट्टाचार्य, डायमंड हार्बर महिला विश्वविद्यालय की प्रो. मीता बनर्जी, बाबा साहेब अम्बेडकर शिक्षा विश्वविद्यालय के प्रो. अरुणाशीष गोस्वामी, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय के प्रो. सौरांग्शु मुखर्जी और अलीहा विश्वविद्यालय के प्रो. रफीकुल इस्लाम भी उपस्थित थे। मिदनापुर के विधायक डॉ. शंकर कुमार गुछैत, जो इस विश्वविद्यालय के गणित विभाग के गौरवशाली पूर्व छात्र हैं, अन्य सम्मानित विधायक, जिला पुलिस अधीक्षक पापिया सुल्ताना (आईपीएस), डॉ. पार्थ कर्मकार, अध्यक्ष, डब्ल्यूबीसीएचएसई, चांदनी टुडू, वरिष्ठ विशेष सचिव, एचईडी, पश्चिम बंगाल सरकार, भी उपस्थित थे, जिससे कार्यक्रम की भव्यता में और इजाफा हुआ।

राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय समाचार एजेंसियों से आए लगभग 40 प्रतिष्ठित प्रेस और मीडियाकर्मियों ने इस अनूठे शैक्षणिक समारोह में भाग लिया। विद्यासागर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. दीपक कुमार कर ने सभी हितधारकों और शुभचिंतकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने 23वें दीक्षांत समारोह को शैक्षणिक एकता का एक उत्कृष्ट और यादगार उत्सव बनाने के लिए सभी के सहयोग की सराहना की।

Articles you may like: