नई दिल्ली: कर्नाटक में डीके शिवकुमार के मुख्यमत्री बनते ही कांग्रेस नेतृत्व ने उनकी जगह बीके हरिप्रसाद को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कमान सौंप दी है। कर्नाटक के बाद अब कांग्रेस संगठन में देशव्यापी बड़े फेरबदल के आसार हैं. पार्टी सूत्रों के मुताबिक जल्द आधा दर्जन से ज्यादा राज्यों के प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष बदलने की तैयारी चल रही है। इसको लेकर बीते हफ्ते राहुल गांधी की कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ बैठक हो चुकी है। बतौर कांग्रेस अध्यक्ष खरगे के कार्यकाल का यह आखिरी बड़ा फेरबदल होगा।
चुनावी राज्यों पर फोकस
कांग्रेस का फोकस उन राज्यों पर है जहां अगले साल की शुरुआत में विधानसभा के चुनाव होने हैं। अगले साल की शुरुवात में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में चुनाव होने हैं। वहीं, अगले साल के आखिर में गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव होंगे। पंजाब को छोड़ सभी राज्यों में कांग्रेस का सीधा मुकाबला बीजेपी से है। हिमाचल में कांग्रेस खुद सत्ता में है।
पंजाब में क्या है प्लान: कांग्रेस आलाकमान पंजाब में प्रदेश अध्यक्ष बदलने पर विचार कर रहा है। भले ही पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल बार-बार दावा कर रहे हैं कि कोई बदलाव नहीं होगा लेकिन प्रदेश अध्यक्ष राजा बराड़ और विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा दोनों एक जाति (जट सिख) हैं। ऐसे में बदलाव करना पार्टी की मजबूरी है। अगले प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर विजय इंदर सिंगला का नाम सबसे आगे है जो राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के सह कोषाध्यक्ष हैं। सिंगला पंजाब में कांग्रेस का 'हिंदू चेहरा' हैं। वहीं दलितों को साधने के नाम पर प्रदेश कांग्रेस के नेताओं का एक बड़ा धड़ा पूर्व सीएम और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी की पैरवी कर रहा है। पंजाब में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस का मुकाबला आम आदमी पार्टी सरकार से है, साथ ही बीजेपी, अकाली दल की भी चुनौती है।
यूपी में दलितों को साधने की कोशिश: उत्तर प्रदेश में कांग्रेस समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर योगी सरकार को हैट्रिक लगाने से रोकने की कवायद में है। यूपी कांग्रेस में बदलाव की दरकार इसलिए है क्योंकि प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे, प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा तीनों अगड़ी जाति से हैं। कांग्रेस की नजर राज्य के दलित वोटरों पर है। ऐसे में माना जा रहा है कि यूपी में कांग्रेस प्रभारी या प्रदेश अध्यक्ष में से किसी एक पद पर दलित नेता की नियुक्ति जरूर करेगी। हालांकि बगल के राज्य बिहार में चुनाव से ठीक पहले दलित प्रदेश अध्यक्ष बनाने का कांग्रेस का दांव नाकाम रहा था।
गोवा और मणिपुर में भी होगा बदलाव! चुनावी राज्य गोवा में कांग्रेस ने हाल में ही गिरीश चोडनकर को प्रदेश की कमान सौंपी है। गिरीश अब तक तमिलनाडु और पुडुचेरी के प्रभारी के पद पर थे। ऐसे में कांग्रेस को तमिलनाडु-पुडुचेरी में नया प्रभारी नियुक्त करना पड़ेगा। साथ ही सूत्रों के मुताबिक राज्य में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति भी की जाएगी।
कांग्रेस ने मणिपुर में इसी साल फरवरी में और उत्तराखंड में पिछले साल नवंबर में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति की थी।
कई राज्यों में प्रभारी-अध्यक्ष की वैकेंसी
जिन राज्यों में हाल में ही विधानसभा के चुनाव हुए हैं, उनमें तमिलनाडु, पुडुचेरी के अलावा केरल, असम और बंगाल के कांग्रेस संगठन में भी बदलाव होने हैं। केरल के प्रदेश अध्यक्ष सनी जोसेफ राज्य सरकार में मंत्री बन चुके हैं। महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रभारी रमेश चेन्नीथला भी केरल की नई सरकार में मंत्री बनाए गए हैं। ऐसे में केरल कांग्रेस को नया अध्यक्ष और महाराष्ट्र कांग्रेस को नया प्रभारी मिलेगा। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद असम के प्रभारी जितेंद्र सिंह ने पद से इस्तीफा दे दिया है। बंगाल के प्रभारी ग़ुलाम अहमद मीर को भी बदला जा सकता है। इससे पहले पिछले साल के अंत में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार हुई थी। सूत्रों के मुताबिक संगठन से जुड़े फेरबदल में कांग्रेस बिहार में भी बड़ा बदलाव करने जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, बदलाव वाली सूची में राजस्थान के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा का नाम भी शामिल है। दिल्ली के प्रभारी काजी निजामुद्दीन उत्तराखंड से विधायक हैं जहां चुनाव होने हैं। ऐसे में उन्हें भी अतिरिक्त जिम्मेदारी से पार्टी मुक्त कर सकती है। कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट के बारे में माना जा रहा है इन्हें छत्तीसगढ़ की जगह किसी बड़े राज्य की जिम्मेदारी दी जा सकती है। वहीं अगले साल के अंत में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव होने हैं। मुकुल वासनिक को गुजरात की जगह किसी दूसरे राज्य की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। रजनी पाटिल की हिमाचल प्रदेश से छुट्टी हो सकती है। आंध्र प्रदेश के प्रभारी मणिकम टैगोर को भी नई जिम्मेदारी मिल सकती है।