घुसपैठियों के बांग्लादेश वापस लौटने पर एक प्रश्न चिन्ह लग गया है। एक तरफ सीमा सुरक्षा बल (BSF) पुशबैक कर गैरकानूनी तरीके से भारत में रह रहे बांग्लादेशियों को वापस भेज रही है वहीं दूसरी ओर पकड़े जाने के डर से अपने जीवन को खतरे में डालकर घुसपैठिए वापस लौटने की कोशिशों में लगातार जुटे हुए हैं।
देर रात को छिपकर सीमा पार करने की कोशिश करने में दो बांग्लादेशी BSF की गोली से घायल हो गए। दोनों सातखीरा कालीगंज उपजिला के बसंत सीमा से सटे कालिंदी नदी को तैरकर पार करने की कोशिश कर रहे थे जब BSF ने उन्हें अपनी गोलियों का निशाना बनाया।
दोनों बांग्लादेशी घुसपैठियों का नाम मोहिउद्दीन गाजी (42) और मोहम्मद शाहीन (28) बताए जाते हैं। घटना मंगलवार (2 जून) की देर रात की बतायी जाती है।
मिली जानकारी के अनुसार करीब 1 साल पहले दोनों तमिलनाडु में राजमिस्त्री का काम करने गए थे। घुसपैठियों के खिलाफ अभियान की शुरुआत होने के बाद दोनों ने अपने देश वापस लौटने का फैसला लिया। दोनों को वर्तमान में सातखीरा के सदर अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।
मोहउद्दीन के परिवार का दावा है कि BSF के माध्यम से देश वापस लौटना आसान नहीं है। जटिल कूटनीतिक समस्याओं को दूर करना पड़ता है। पिछले 4 दिनों से उत्तर 24 परगना जिले के बेनापोल के सादिपुर सीम पर कुछ बांग्लादेशी जीरो लाइन पर फंसे हुए थे। मानवता के लिहाज से BSF उन्हें वापस ले आए।
वहीं दक्षिण दिनाजपुर में सीमा क्षेत्र से मंगलवार (2 जून) की रात BSF ने 11 लोगों को बांग्लादेशियों को डिपोर्ट कर दिया। हालांकि किस सीमा मार्ग से उन्हें भेजा गया इसका खुलासा जिला प्रशासन ने नहीं किया। इस बारे में जिलाधिकारी बाला सुब्रमणियन टी ने कहा कि यह एक सरकारी प्रक्रिया है और इसे तय नियमों के तहत पूरा किया जा रहा है।
बुधवार (3 जून) की दोपहर के बाद जिले के रामपुर होल्डिंग सेंटर में कोई भी अवैध घुसपैठिया नजर नहीं आया। बताया गया कि 28 मई की रात से रामपुर कर्मतीर्थ होल्डिंग सेंटर में इन लोगों को रखा जा रहा था।