पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार को रोकने के लिए राज्य भर के पंचायत कर्मियों के एक समूह के तबादले का आदेश पंचायत व ग्रामोन्नयन विभाग ने दिया। इस बारे में जिलाधिकारियों को आदेश दिया गया है कि 3 साल से अधिक समय से जो पंचायत कर्मी एक ही जगह पर कार्यरत हैं, उन्हें अविलंब स्थानांतरित करना होगा।
इस बात की जानकारी 4 जून को मृत्तिका भवन में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर विभाग के मंत्री दिलीप घोष ने की।
नियमित रूप से होगा ऑडिट
मीडिया को संबोधित करते हुए दिलीप घोष ने कहा कि पिछले 3 सालों से करीब 1100 ऐसे पंचायत कर्मी हैं, जिनका तबादला नहीं हुआ है। इसी महीने में उनका स्थानांतरण किया जाएगा। इसके साथ ही सभी ग्राम पंचायतों में अब से नियमित रूप से ऑडिट भी किया जाएगा। घोष ने कहा कि अब तक अनियमित रूप से ऑडिट होता था। अब से समय-समय पर होगा।
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पंचायत स्तर पर नियुक्ति को लेकर बड़ी घोषणा
इसके साथ ही दिलीप घोष ने पंचायत स्तर पर नियुक्ति के संबंध में बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि राज्य के त्रिस्तरीय पंचायतों में 11,154 पद रिक्त पड़े हुए हैं। उनमें से 9,936 पद ग्राम पंचायत, 660 पद पंचायत समिति और जिला या महकमा स्तर पर 558 पद खाली पड़े हैं।
पहले मंत्रिमंडल की बैठक में 6,536 रिक्त पदों का अनुमोदन मिला था लेकिन नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई थी। अब से नियमानुसार परीक्षा के माध्यम से नियुक्ति की प्रक्रिया संपन्न की जाएगी।
शुरू हो चुका है केंद्र से आवंटन का मिलना
दिलीप घोष ने कहा कि केंद्र सरकार की सभी ग्रामोन्नयन परियोजनाओं को राज्य में लागू किया जाएगा। केंद्र से आवंटन मिलना भी शुरू हो गया है। केंद्र सरकार ने राज्य के ग्रामीण इलाकों में 2790 किलोमीटर सड़क और 45 नई सेतु का निर्माण करने का फैसला लिया है।
मंत्री ने कहा कि इसके लिए लगभग ₹2500 करोड़ रुपए खर्च होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि जून तक राज्य में 100 दिनों का काम यानी मनरेगा लागू रहेगा। इसके बाद जुलाई से VB-G-RAM G का 125 दिनों का काम शुरू होगा। इसके लिए वार्षिक ₹12,850 का खर्च होगा।
साथ ही राज्य में 1 लाख नई स्व-निर्भर समूहों का गठन किया जाएगा। प्रत्येक स्व-निर्भर समूह के लिए 3 लाख रुपए का कर्ज देने की व्यवस्था भी की जाएगी।
इसके साथ ही दिलीप घोष ने भ्रष्टाचार रोकने के लिए दिशा कमेटी के बैठक के निर्देश भी दिए। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की योजनाएं सही तरीके से लागू हो रही हैं या नहीं, इस पर निगरानी रखने के लिए इस समिति के गठन की पहल केंद्र की ओर से ही की गई थी।
दिलीप घोष ने कहा कि इस समिति की अध्यक्षता सांसद करते हैं। मैं भी सांसद था, लेकिन मुझे कभी बुलाया नहीं गया। इस संबंध में जिलाधिकारी को निर्देश दिए गए हैं। समन्वय के साथ ही विकास कार्य आगे बढ़ते हैं।