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हरित ईंधन की ओर बड़ा कदम: एथेनॉल नेटवर्क विस्तार से ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मिलेगी रफ्तार

केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी बोले- फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के साथ विकसित हो रहा पूरा इकोसिस्टम, चरणबद्ध तरीके से बढ़ेगा एथेनॉल इंफ्रास्ट्रक्चर।

By श्वेता सिंह

Jun 04, 2026 18:06 IST

नई दिल्ली: देश में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने घोषणा की है कि सरकार लगभग 5,200 एथेनॉल डिस्ट्रीब्यूशन स्टेशन प्रमुख क्षेत्रों में शुरू कर रही है। इनमें दिल्ली-एनसीआर, पुणे, मुंबई और नागपुर जैसे बड़े शहर शामिल होंगे, जहां फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की मांग और उपयोग की संभावनाएं अधिक मानी जा रही हैं। यह पहल देश में हरित ईंधन के उपयोग को बढ़ाने और पारंपरिक पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने की रणनीति का हिस्सा है।

केंद्रीय मंत्री ने यह जानकारी मारुति सुजुकी वैगनआर के फ्लेक्स-फ्यूल संस्करण के लॉन्च कार्यक्रम के मौके पर दी। उन्होंने कहा कि पहले E-100 एथेनॉल डिस्पेंसिंग स्टेशनों को स्थापित करने का प्रयास किया गया था, लेकिन उस समय उपयुक्त वाहन मॉडल उपलब्ध नहीं होने के कारण यह योजना सफल नहीं हो सकी।

चरणबद्ध विस्तार की योजना

हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, अब सरकार लगभग 5,200 एथेनॉल पंपों से शुरुआत कर रही है और इसे चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने बताया कि योजना के तहत यह संख्या 2026 के अंत तक 500 स्टेशनों के विस्तार लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ेगी और 2027 के अंत तक इसे लगभग 5,000 तक पहुंचाने की संभावना है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का उपयोग बढ़ेगा, देश में एथेनॉल की खपत भी तेजी से बढ़ेगी। अनुमान के अनुसार, यदि नए वाहनों में से लगभग 50 प्रतिशत फ्लेक्स-फ्यूल अनुकूल हो जाते हैं, तो करीब 400 करोड़ लीटर अतिरिक्त एथेनॉल की मांग पैदा हो सकती है।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि इस नीति का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य कृषि क्षेत्र में बदलाव को प्रोत्साहित करना है। सरकार पानी की अधिक खपत वाली फसलों की जगह मक्का जैसी फसलों को बढ़ावा देना चाहती है, जिससे किसानों को बेहतर विकल्प मिल सके और संसाधनों का संतुलित उपयोग हो।

एथेनॉल मांग में बड़ा उछाल

कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत में दोपहिया वाहनों की संख्या 30 करोड़ से अधिक है, जबकि लगभग 37 लाख यात्री वाहन मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में यदि फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक इस सेगमेंट में बड़े पैमाने पर अपनाई जाती है, तो इसका प्रभाव बेहद व्यापक होगा।

उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा का उल्लेख करते हुए यह भी कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत में ईंधन आपूर्ति स्थिर बनी हुई है। उन्होंने बताया कि देश ने एलपीजी उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। पहले जहां घरेलू उत्पादन कम था और भारी आयात पर निर्भरता थी, वहीं अब स्थिति में सुधार हुआ है और घरेलू आपूर्ति में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार का मानना है कि एथेनॉल आधारित ईंधन व्यवस्था, फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों और कृषि आधारित कच्चे माल के विस्तार के साथ भारत ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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