🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

क्यों जीवन में महत्वपूर्ण बनती जा रही हैं Chosen Sister? खून का रिश्ता नहीं लेकिन खून के रिश्ते से कम भी नहीं

महिलाओं को अपनी खोयी साथी मिलती है 'Chosen Sister' के तौर पर...जिनके साथ खून का रिश्ता तो नहीं होता है। जो दोस्त या बहन नहीं बल्कि उससे कहीं ज्यादा खास होती है।

By Moumita Bhattacharya

Jun 04, 2026 19:56 IST

बचपन की सहेलियां कभी दिन-रात की साथी होती थी। लेकिन बाद में धीरे-धीरे व्यस्तता बढ़ने लगी और उसके साथ ही वह सहेलियां भी न जाने कहां खो जाती हैं। इसके बदले में साथी बनता है अकेलापन, मानसिक थकान...और कई बार इससे उत्पन्न बीमारियां।

लेकिन सबके बीच कई बार महिलाओं को अपनी खोयी साथी मिलती है 'Chosen Sister' के तौर पर...जिनके साथ खून का रिश्ता तो नहीं होता है। जो दोस्त या बहन नहीं बल्कि उससे कहीं ज्यादा खास होती है।

आखिर कौन हैं Chosen Sister?

Chosen Sister को अगर सीधे शब्दों में कहा जाए तो वे दोस्त या सहेलियां ही होती हैं। कोई ऐसी व्यक्ति जिसके साथ खून का रिश्ता नहीं होता। फिर भी संबंध की गहराई में कोई कमी नहीं होती। ये वहीं होती हैं जिनसे बात करने के लिए किसी खास वजह की जरूरत नहीं पड़ती या जिनके सामने खुद को छिपाना नहीं पड़ता।

Read Also | जीवन की किन परिस्थितियों में चुप रहना बेहतर होता है?

रात के दो बजे मन उदास हो तो फोन सबसे पहले उन्हीं को किया जाता है। कोई अच्छी खबर मिले तो सबसे पहली खुशी इन्हीं के साथ बांटने का मन होता है क्योंकि इस रिश्ते की नींव विश्वास, समझ और निःस्वार्थ प्रेम पर टिकी होती है।

जीवन के हर पड़ाव पर महत्वपूर्ण होती हैं Chosen Sister Image - AI

क्यों बढ़ती जा रही है Chosen Sister पर निर्भरता?

विशेषज्ञों की मानें तो पढ़ाई या काम के कारण बहुत से लोग अपने घर से दूर रहने लगते हैं। कोई दूसरे शहर में तो कोई दूसरे देश में। उम्र बढ़ने के साथ माता-पिता से स्वाभाविक रूप से एक भावनात्मक दूरी बन जाती है। ऐसे में हर बात माता-पिता से शेयर करना संभव नहीं होता क्योंकि उन्हें चिंता हो सकती है।

इस खालीपन को अक्सर अच्छे दोस्त भरते हैं। सच्ची दोस्ती में दूरी कोई मायने नहीं रखती। हजारों मील दूर रहते हुए भी एक दोस्त दूसरे के मन की स्थिति समझ सकता है। सालों तक न मिलने पर भी जरूरत के समय वही व्यक्ति सबसे पहले साथ खड़ा होता है।

खास बात है कि इस रिश्ते में खुद को साबित करने का कोई दबाव नहीं होता। वहां कोई जजमेंट नहीं होता बल्कि सहानुभूति मिलती है। आलोचना नहीं बल्कि सुकून और समझ मिलती है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि यह रिश्ता खून से नहीं बल्कि भावनाओं, विश्वास और बिना शर्त समर्थन से बनता है। इसमें लोग खुद को पूरी तरह से सुरक्षित और स्वीकृत महसूस करते हैं।

Read Also | छोटी उम्र से बनाएं बच्चों का आत्मविश्वास, माता-पिता का व्यवहार ही तय करता है बच्चों का भविष्य

बिना किसी शर्त के समर्थन - खून के रिश्तों से अलग दोस्ती पूरी तरह अपनी पसंद से बनती है। इसमें किसी तरह की सामाजिक बाध्यता या पारिवारिक दबाव नहीं होता। इसलिए अच्छे और बुरे - हर परिस्थिति में लोग बिना किसी शर्त के एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं।

मानसिक शांति - कार्यस्थल या व्यक्तिगत जीवन के तनाव और खींचतान से जब लोग थक जाते हैं, तब ऐसे दोस्तों के सामने मन खोलकर हल्का महसूस किया जा सकता है। यहां न कोई जज करता है और न ही गलत समझे जाने का डर सताता है। इसलिए मानसिक शांति भी भरपूर मिलती है।

दूरी की कोई परवाह नहीं - जीवन की जरूरतों के कारण लोग अलग-अलग शहरों या देशों में रहने लगते हैं लेकिन मन की दूरी नहीं बढ़ती। तकनीक के इस युग में ग्रुप चैट या वीडियो कॉल के जरिए वे एक-दूसरे के दैनिक जीवन का हिस्सा बने रहते हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत एक-दूसरे के पास पहुंच जाते हैं।

Articles you may like: