वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन अब केवल चुनिंदा विश्वविद्यालयों की जांच तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि पूरे उच्च शिक्षा तंत्र को प्रभावित करने वाले संघीय नियमों में व्यापक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रशासन उन मुद्दों को नए नियमों में शामिल करने की तैयारी कर रहा है, जिन पर पिछले वर्ष कई विश्वविद्यालयों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की गई थी। अमेरिकी शिक्षा विभाग के अवर सचिव निकोलस केंट ने कहा कि सरकार उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधारात्मक बदलाव लाने का प्रयास कर रही है। व्यक्तिगत संस्थानों पर कार्रवाई के बजाय नए नियम लगभग 6,000 शैक्षणिक संस्थानों को प्रभावित कर सकते हैं।
किन मुद्दों पर फोकस कर रहा है प्रशासन?
ट्रंप प्रशासन जिन विषयों को लेकर पहले विश्वविद्यालयों की जांच करता रहा, अब उन्हें व्यापक नीतिगत ढांचे में शामिल करने की तैयारी है। इनमें शामिल हैं: विविधता, समानता और समावेशन (डीईआई) नीतियां. ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों की भागीदारी, यहूदी-विरोध (एंटीसेमिटिज्म) से जुड़े मुद्दे, श्वेत समुदाय के खिलाफ कथित भेदभाव, विश्वविद्यालय परिसरों में वैचारिक संतुलन आदि।
मान्यता प्रणाली में बदलाव का प्रस्ताव
अमेरिकी शिक्षा विभाग ने कॉलेजों की मान्यता (एक्रिडिटेशन) प्रक्रिया में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत मान्यता देने वाली संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि विश्वविद्यालयों में बौद्धिक विविधता मौजूद हो। आलोचकों का मानना है कि यह रूढ़िवादी विचारों को अधिक प्रतिनिधित्व देने का प्रयास हो सकता है। इसके अलावा प्रबंधन एवं बजट कार्यालय (ओएमबी) ने प्रस्ताव रखा है कि संघीय अनुदान राष्ट्रपति की नीतिगत प्राथमिकताओं के अनुरूप होने चाहिए। प्रस्ताव के अनुसार अनुदान का उपयोग डीईआई कार्यक्रमों, कथित अमेरिका-विरोधी मूल्यों या मानव लिंग की द्विआधारी अवधारणा को नकारने वाले कार्यक्रमों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
नए नियमों की संख्या और प्रभाव
शिक्षा विभाग में अब तक कम से कम 11 नए नियम प्रस्तावित।
नागरिक अधिकार कानूनों के उल्लंघन पर संस्थानों की फंडिंग रोकने की प्रक्रिया सरल बनाने की तैयारी।
संघीय अनुदान प्राप्त करने वाले संस्थानों और ठेकेदारों के लिए डीईआई नीतियों पर नए प्रमाणन नियम प्रस्तावित।
नियम निर्माण प्रक्रिया के माध्यम से कांग्रेस की मंजूरी के बिना संघीय नीति लागू करने की कोशिश।
विश्वविद्यालयों की प्रतिक्रिया
अमेरिकन काउंसिल ऑन एजुकेशन के अध्यक्ष टेड मिशेल ने कहा कि नए नियमों के जरिए संवाद की संभावना बनी है, जो पहले सीधे हमलों और जांचों के दौरान संभव नहीं थी। उनके अनुसार अब विश्वविद्यालयों को प्रशासन के साथ सहमति और असहमति दोनों बिंदुओं पर चर्चा का अवसर मिलेगा।
जांचों में कमी लेकिन विवाद जारी
इस वर्ष शिक्षा विभाग और न्याय विभाग ने अपेक्षाकृत कम विश्वविद्यालयों के खिलाफ नई जांचों की घोषणा की है। जहां पिछले वर्ष इसी अवधि में 70 से अधिक मामलों की घोषणा हुई थी, वहीं इस वर्ष लगभग एक दर्जन विश्वविद्यालयों का ही उल्लेख किया गया है। हालांकि पिछले वर्ष शुरू की गई अधिकांश जांचें अब भी लंबित हैं। कोलंबिया विश्वविद्यालय, ब्राउन विश्वविद्यालय और कुछ अन्य संस्थानों के साथ समझौते हुए हैं लेकिन कई मामलों में अभी तक अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
हार्वर्ड और यूसीएलए के साथ टकराव बरकरार
संघीय अदालतों द्वारा फंडिंग कटौती रोकने के बावजूद ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजिलिस (यूसीएलए) के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रखी है। फरवरी से अब तक अमेरिकी न्याय विभाग दोनों संस्थानों के खिलाफ चार मुकदमे दायर कर चुका है। आरोप है कि इन परिसरों में यहूदी-विरोधी घटनाओं को पर्याप्त रूप से नहीं रोका गया तथा हार्वर्ड ने प्रवेश संबंधी कुछ आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए।
प्रवेश प्रक्रिया भी जांच के दायरे में
प्रशासन अब विश्वविद्यालयों की प्रवेश नीतियों पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। आरोप है कि कुछ संस्थान सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सकारात्मक भेदभाव (अफर्मेटिव एक्शन) पर रोक के बाद भी जातीय और नस्लीय आधार पर प्रवेश निर्णयों को प्रभावित कर रहे हैं। हाल में येल विश्वविद्यालय और यूसीएलए के चिकित्सा महाविद्यालयों पर श्वेत और एशियाई-अमेरिकी छात्रों के साथ भेदभाव के आरोप लगाए गए। दोनों संस्थानों ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उनकी प्रवेश प्रक्रिया योग्यता आधारित और निष्पक्ष है।
उच्च शिक्षा क्षेत्र में दिख रहे बदलाव
पिछले वर्ष शुरू हुई कार्रवाई के बाद कई विश्वविद्यालयों ने बदलाव किए हैं: कई परिसरों ने डीईआई कार्यालय बंद किए। एनसीएए ने ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों से जुड़े नियमों में बदलाव किए। यूसीएलए और कोलंबिया विश्वविद्यालय सहित कई संस्थानों ने प्रदर्शन संबंधी नियम सख्त किए। शोध गतिविधियों पर फंडिंग कटौती का असर पड़ा। शिक्षकों और शोधकर्ताओं में सरकारी निगरानी को लेकर चिंता बढ़ी। हालांकि अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटी प्रोफेसर्स (एएयूपी) के अध्यक्ष टॉड वुल्फसन का मानना है कि विश्वविद्यालय अब अधिक संगठित होकर प्रशासन की नीतियों का कानूनी और संस्थागत स्तर पर मुकाबला कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा क्षेत्र धीरे-धीरे अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और आगे भी विरोध जारी रहेगा।