नई दिल्ली : भारतीय मुक्केबाजी ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया है। ताजा विश्व मुक्केबाजी रैंकिंग में एशियाई चैंपियन प्रिया घनघास और विश्वनाथ सुरेश ने अपने-अपने भार वर्ग में शीर्ष तीन में जगह बनाकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वहीं जैसमीन लम्बोरिया ने महिला 57 किलोग्राम वर्ग में दुनिया की नंबर एक मुक्केबाज बनने का गौरव प्राप्त किया है। नई रैंकिंग में भी भारत की मजबूत उपस्थिति बरकरार रही है।
भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, भारत अब दुनिया की अग्रणी मुक्केबाजी शक्तियों में शामिल हो चुका है। महिला वर्ग के 10 में से 9 भार वर्गों में भारतीय मुक्केबाज शीर्ष-10 में मौजूद हैं, जबकि पुरुष वर्ग के 10 में से 8 भार वर्गों में भारतीय खिलाड़ियों ने शीर्ष-10 में स्थान बनाया है।
महिला वर्ग में मीनाक्षी ने 48 किलोग्राम भार वर्ग में दुनिया की नंबर एक मुक्केबाज के रूप में अपना स्थान बरकरार रखा है। इसी वर्ग में प्रीति तीसरे स्थान पर पहुंच गई हैं। 70 किलोग्राम वर्ग में अरुंधति चौधरी, 80 किलोग्राम वर्ग में पूजा रानी और 80 किलोग्राम से अधिक भार वर्ग में नूपुर दुनिया की नंबर दो मुक्केबाज के रूप में रैंकिंग में शामिल हैं। इससे स्पष्ट होता है कि भारत अब भारी भार वर्गों में भी लगातार मजबूती हासिल कर रहा है।
अनुभवी मुक्केबाज निकहत ज़रीन (51 किलोग्राम) और लवलीना बोरगोहेन (75 किलोग्राम) ने भी विश्व स्तर पर अपनी मजबूत स्थिति कायम रखी है और वे अभी भी दुनिया की शीर्ष मुक्केबाजों में शामिल हैं।
पुरुष वर्ग में भी भारतीय मुक्केबाजों ने शानदार निरंतरता दिखाई है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छे प्रदर्शन के दम पर सचिन और नरेंद्र शीर्ष पांच में जगह बनाने में सफल रहे हैं। 70 किलोग्राम वर्ग में हितेश गुलिया ने दुनिया के छठे नंबर के मुक्केबाज के रूप में अपनी रैंकिंग बरकरार रखी है। 65 किलोग्राम वर्ग में अभिनाश जमवाल आठवें स्थान पर हैं।
इसके अलावा 75 किलोग्राम वर्ग में आकाश और 85 किलोग्राम वर्ग में लोकेश ने भी शीर्ष-10 में प्रवेश किया है, जो विभिन्न भार वर्गों में भारतीय मुक्केबाजी की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को दर्शाता है।
भारतीय मुक्केबाजी महासंघ के अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा कि ये रैंकिंग पिछले कुछ वर्षों में विकसित की गई मजबूत संरचनाओं और व्यवस्थाओं का परिणाम है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर प्रतिभा विकास से लेकर उच्च स्तरीय प्रशिक्षण तक, महासंघ का लक्ष्य एक स्थायी प्रतिभा श्रृंखला तैयार करना रहा है। उन्होंने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि आज लगभग हर भार वर्ग में भारतीय मुक्केबाज विश्व स्तर पर मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं और भारत दुनिया के प्रमुख मुक्केबाजी देशों में मजबूती से स्थापित हो चुका है।
ताजा रैंकिंग भारत की गहराई और निरंतरता को भी दर्शाती है। विभिन्न भार वर्गों में बड़ी संख्या में भारतीय मुक्केबाज प्रतिस्पर्धी वैश्विक स्थान हासिल करने में सफल रहे हैं। वर्तमान में शीर्ष-10 रैंकिंग वाले खिलाड़ियों की संख्या के आधार पर भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है। महिला मुक्केबाजी में भारत दूसरा सबसे मजबूत देश बनकर उभरा है, जबकि पुरुष वर्ग में भारत चौथे स्थान पर मौजूद है।
विशेष रूप से शीर्ष तीन रैंकिंग वाले मुक्केबाजों की संख्या के आधार पर भारत कुल मिलाकर तीसरे स्थान पर है, लेकिन महिला वर्ग में दुनिया में पहले स्थान पर पहुंच गया है। यह वैश्विक मंच पर भारतीय महिला मुक्केबाजी के बढ़ते वर्चस्व का प्रमाण माना जा रहा है।
भारत की ताकत केवल शीर्ष-10 तक सीमित नहीं है। महिला वर्ग में 60 किलोग्राम में परवीन 13वें स्थान पर हैं। 65 किलोग्राम वर्ग में अंकुशिता बोरो 11वें स्थान पर रहते हुए शीर्ष-10 में प्रवेश से मामूली अंतर से चूक गईं। इसके अलावा 75 किलोग्राम वर्ग में स्वीटी, 54 किलोग्राम में साक्षी, 60 किलोग्राम में संजू और 65 किलोग्राम में नीरज फोगाट भी वैश्विक रैंकिंग में प्रतिस्पर्धी स्थिति बनाए हुए हैं।
पुरुष वर्ग में 80 किलोग्राम के अंकुश 11वें स्थान पर हैं और शीर्ष-10 से ठीक बाहर हैं। 70 किलोग्राम वर्ग में दीपक 12वें स्थान पर हैं। 85 किलोग्राम वर्ग में जुगनू 14वें स्थान पर मौजूद हैं। 90 किलोग्राम वर्ग में हर्ष चौधरी 10वें स्थान पर हैं, जबकि सुमित (75 किलोग्राम) और कुमार नवीन (90 किलोग्राम) 18वें स्थान पर काबिज हैं। 75 किलोग्राम वर्ग में निखिल दुबे और 90 किलोग्राम वर्ग में विशाल अपने-अपने वर्गों में संयुक्त रूप से 22वें स्थान पर हैं।
विश्व मुक्केबाजी रैंकिंग में भारत की यह उल्लेखनीय प्रगति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार हासिल की जा रही सफलताओं का परिणाम है। विश्व मुक्केबाजी कप फाइनल में रिकॉर्ड प्रदर्शन, विश्व चैंपियनशिप में शानदार पदक उपलब्धियां तथा सीनियर और आयु वर्ग की प्रतियोगिताओं में निरंतर अच्छे नतीजों ने भारत की स्थिति को लगातार मजबूत किया है।
ताजा रैंकिंग एक बार फिर यह साबित करती है कि भारतीय मुक्केबाजी का प्रभाव अब वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में भारत इस खेल की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।