नई दिल्ली/कोलकाताः नई दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक के एक दिन बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से उनके आवास पर मुलाकात की। सोमवार को आयोजित विपक्षी दलों की बैठक में भी दोनों नेता शामिल हुई थीं।
तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस मुलाकात का उल्लेख करते हुए दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक और व्यक्तिगत संबंधों को रेखांकित किया। पार्टी ने कहा कि राष्ट्र की सेवा के वर्षों के अनुभव से दोनों नेताओं के बीच संबंध और अधिक मजबूत हुए हैं।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब तृणमूल कांग्रेस संगठनात्मक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की पराजय के बाद नेतृत्व से जुड़े मुद्दों पर असंतोष सामने आया है। विपक्ष के नेता के चयन को लेकर पार्टी नेतृत्व के निर्णय का एक बड़ा वर्ग विरोध कर चुका है। इसके अतिरिक्त, कुछ सांसदों के बीच मतभेद भी उभरकर सामने आए हैं। पार्टी के भीतर एक समूह ने लगभग 20 लोकसभा सांसदों के समर्थन का दावा करते हुए अलग संसदीय गुट बनाने की इच्छा व्यक्त की है।
इसी बीच, कथित हस्ताक्षर जालसाजी प्रकरण की जांच के सिलसिले में पश्चिम बंगाल अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) की एक टीम कोलकाता स्थित ममता बनर्जी के आवास पहुंची। इससे पहले सीआईडी की टीम तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी के आवास पर भी गई थी।
मामले की जांच के लिए राज्य सीआईडी ने पांच सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। अधिकारियों के अनुसार, जांच की निगरानी पश्चिम बंगाल पुलिस के एक उप महानिरीक्षक (डीआईजी) स्तर के अधिकारी कर रहे हैं ताकि पूरे मामले की विस्तृत पड़ताल सुनिश्चित की जा सके।
जांच एजेंसी ने अभिषेक बनर्जी से पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए पार्टी के मूल प्रस्ताव की प्रति उपलब्ध कराने को कहा है। तृणमूल कांग्रेस सूत्रों के अनुसार अभिषेक बनर्जी ने अपने विधिक सलाहकार के माध्यम से औपचारिक पत्र भेजकर एजेंसी को जवाब दिया है।
सीआईडी अब तक 13 तृणमूल कांग्रेस विधायकों के बयान दर्ज कर चुकी है। अधिकारियों के अनुसार तीन विधायकों ने दावा किया कि 6 मई की बैठक से संबंधित प्रस्ताव पुस्तिका में दर्ज हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। वहीं कैनिंग पूर्व विधानसभा क्षेत्र के एक विधायक ने कहा कि वह कोलकाता में आयोजित उस बैठक में उपस्थित ही नहीं थे।
जांच के दौरान सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी को मूल बैठक प्रस्ताव पुस्तिका के साथ जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने के लिए भी कहा है। अभिषेक बनर्जी ने 9 मई को विधानसभा अध्यक्ष को सूचित किया था कि पार्टी पदाधिकारियों की नियुक्ति का निर्णय अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस विधायक दल की बैठक में लिया गया था।
इसके बाद 18 मई को पश्चिम बंगाल विधानसभा के प्रधान सचिव ने अभिषेक बनर्जी को पत्र लिखकर बैठक की कार्यवाही, प्रस्ताव तथा निर्णय प्रक्रिया में शामिल विधायकों के हस्ताक्षरों से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। 20 मई को अभिषेक बनर्जी ने बैठक प्रस्ताव पुस्तिका की एक प्रति और उपस्थिति पत्रक जमा कराया, जिसमें उल्लेख था कि 6 मई की बैठक में 70 विधायक उपस्थित थे।
27 मई को अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के दो विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप था कि 6 मई को विपक्ष के नेता के चयन को लेकर कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था और उन्होंने बैठक प्रस्ताव पुस्तिका पर हस्ताक्षर 19 मई को किए थे। शिकायतकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि 6 मई की तारीख वाला प्रस्ताव बाद में तैयार किया गया तथा उसमें 14 हस्ताक्षर बड़े अक्षरों में दर्ज किए गए थे।
इसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने दोनों विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को कथित दल-विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित कर दिया। विधानसभा के प्रधान सचिव की शिकायत के आधार पर हेयर स्ट्रीट थाना ने 27 मई को भारतीय न्याय संहिता की धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। अगले दिन 28 मई को, इस मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी गई।