नई दिल्लीः असम की प्रसिद्ध तेजपुर लीची ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हुए एक नई उपलब्धि हासिल की है। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की सहायता से भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त तेजपुर लीची की पहली खेप दुबई भेजी गई है। इसे पूर्वोत्तर भारत के कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
दुबई पहुंची एक टन लीची की पहली खेप
7 जून को निर्यात की गई इस खेप में एक मीट्रिक टन जीआई-टैग प्राप्त तेजपुर लीची शामिल थी। असम की यह विशेष बागवानी फसल अपनी प्राकृतिक मिठास, चमकदार लाल रंग, विशिष्ट सुगंध और बेहतर स्वाद के लिए जानी जाती है।
एपीडा (APEDA) के अनुसार, यह निर्यात केवल एक व्यापारिक उपलब्धि नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के कृषि उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते अवसरों का संकेत है।
GI टैग से बढ़ी वैश्विक पहचान
तेजपुर लीची को मिले भौगोलिक संकेतक (GI) दर्जे ने इसकी विशिष्ट पहचान को मजबूत किया है। इससे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच उत्पाद की विश्वसनीयता और मांग बढ़ी है। एपीडा का मानना है कि वैश्विक बाजारों में भारतीय जीआई-टैग कृषि उत्पादों की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है और तेजपुर लीची इसका नया उदाहरण बनकर उभरी है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस उपलब्धि के बारे में ट्वीट किया एक्स अकाउंट पर।
असम की प्रसिद्ध GI-टैग प्राप्त तेजपुर लीची अब विदेशी बाजारों में अपनी मिठास बिखेर रही है।@APEDADOC के सहयोग से तेजपुर लीची की पहली निर्यात खेप दुबई रवाना हुई। इस कदम से यहां की लीची को वैश्विक पहचान मिलेगी, किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त होगा और पूर्वोत्तर भारत के कृषि उत्पादों… pic.twitter.com/K1LUVR8r5n
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) June 8, 2026
किसानों को मिला बेहतर मूल्य
इस पहल का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय किसानों को मिला है। एपीडा के अनुसार, निर्यात आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े उत्पादकों को घरेलू बाजार में प्रचलित कीमतों की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक मूल्य प्राप्त हुआ। यह तब संभव हुआ जब स्थानीय बाजार में भी लीची की मांग मजबूत बनी हुई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात के नए अवसर किसानों को उच्च आय के साथ-साथ बेहतर विपणन विकल्प भी उपलब्ध कराएंगे।
निर्यात से खुलेंगे नए अवसर
एपीडा ने कहा कि इस पहल से लीची उत्पादकों के लिए नए बाजार विकसित होंगे और अधिक किसान निर्यात-आधारित मूल्य श्रृंखला से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित होंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ किसानों की आजीविका अधिक टिकाऊ बन सकेगी।
इस ऐतिहासिक निर्यात खेप को तेजपुर के विधायक पृथ्वीराज रावा, असम की कृषि उत्पादन आयुक्त अरुणा राजोरिया, एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव, सोनितपुर के जिला आयुक्त आनंद कुमार दास तथा डीएमआर ग्रीन वैली एग्रो फ्रेश प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में रवाना किया गया।
पूर्वोत्तर के निर्यात को बढ़ावा देने पर फोकस
एपीडा लंबे समय से पूर्वोत्तर क्षेत्र के कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है। इसके तहत बुनियादी ढांचे का विकास, गुणवत्ता प्रमाणन, क्षमता निर्माण, निर्यातोन्मुख उत्पादन पद्धतियां और बाजार संपर्क जैसी पहलें चलाई जा रही हैं।
प्राधिकरण का मानना है कि तेजपुर लीची का यह सफल निर्यात भविष्य में बड़े स्तर पर निर्यात का रास्ता खोलेगा और असम के अन्य जीआई-टैग उत्पादों को भी वैश्विक पहचान दिलाने में मदद करेगा।
एपीडा ने कहा कि यह पहल भारतीय किसानों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने और पूर्वोत्तर भारत की कृषि क्षमता को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की उसकी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। आने वाले समय में इससे क्षेत्र के कृषि निर्यात में और तेजी आने की उम्मीद है।