विदेश जाना और वहां जाकर नौकरी करना काफी युवाओं का सपना होता है। लेकिन अक्सर लोग यहीं सोचते हैं कि जब तक हाथों में जॉब का ऑफर लेटर न हो, तब तक वीजा नहीं मिल सकता है। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है।
एक ऐसा तरीका भी है जिसकी मदद से आप पहले वीजा लेकर विदेश पहुंच सकते हैं और वहां जाकर तब नौकरी ढूंढ सकते हैं। हालांकि इस विशेष तरीके से सिर्फ चुनिंदा देशों का वीजा ही मिल सकता है।
दुनिया के कुछ ऐसे देश भी होते हैं जो विदेशी नागरिकों के लिए जॉब सीटर वीजा (Job Seeker Visa) उपलब्ध करवाते हैं। हालांकि इसे पाने से पहले डॉक्यूमेंट दिखाने पड़ते हैं और यह साबित करना पड़ा है कि वीजा का आवेदक अमुक देश में सिर्फ जॉब के मकसद से ही जा रहा है। आइए इस बारे में आपको विस्तार से बताते हैं -
क्या है जॉब सीकर वीजा?
यह वीजा एक विशेष प्रकार की वीजा होती है जिसके जरिए भारतीयों को दूसरे देशों में नौकरी के अवसर ढूंढने में मदद मिलती है। खास बात है कि जॉब सीकर वीजा कुछ चुनिंदा देश ही जारी करते हैं। ये वीजा एक साल से लेकर कुछ महीनों तक जारी हो सकते हैं। इस दौरान अगर नौकरी मिल जाती है तो वीजा को 'वर्क परमिट' या फिर 'रेसिडेंस परमिट' में बदल दिया जाता है।
कौन से देश देते हैं यह वीजा?
जॉब सीकर वीजा मुख्य रूप से जिन देशों में दिया जाता है, उनमें यूरोपीय देश शामिल हैं। इसके पीछे की वजह बताते हुए दावा किया जाता है कि यहां वर्कर्स की बहुत कमी है। इस वजह से भारतीयों को सीधे वहां जाकर नौकरी ढूंढने के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।
जॉब सीकर वीजा देने वाले प्रमुख देश :
जर्मनी - जर्मनी में इसे 'ऑपर्च्युनिटी कार्ड' कहा जाता है। यह 1 साल के लिए जारी किया जाता है जिस दौरान स्किल्ड वर्कर्स जर्मनी में रहकर वहां नौकरी ढूंढ सकते हैं।
स्वीडन - यहां दिया जाने वाला जॉब सीकर वीजा 9 महीने के लिए वैध रहता है।
ऑस्ट्रिया - यहां कैटेगरी डी जॉब सीकर वीजा दिया जाता है जिसकी वैधता 6 महीने की होती है।
संयुक्त अरब अमीरात - यह उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहां जॉब सीकर वीजा प्रदान किया जाता है।
पुर्तगाल - इस यूरोपीय देश में 120 दिनों के लिए जॉब सीकर वीजा दिया जाता है जिसकी वैधता को 60 दिनों के लिए एक्सटेंड किया जा सकता है।