नई दिल्लीः नीट-यूजी (NEET UG) परीक्षा रद्द होने के बाद दोबारा परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के सामने केवल पढ़ाई की चुनौती नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक दबाव भी खड़ा हो गया है। कई छात्रों का कहना है कि उन्होंने महीनों और कुछ मामलों में वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा दी थी और अच्छे परिणाम की उम्मीद कर रहे थे। ऐसे में परीक्षा रद्द होने की खबर उनके लिए बड़ा झटका साबित हुई।
छात्रों का कहना है कि परीक्षा के बाद वे राहत महसूस कर रहे थे और सामान्य दिनचर्या में लौटने लगे थे, लेकिन री-टेस्ट की घोषणा के बाद उन्हें फिर उसी तैयारी और तनाव के दौर में लौटना पड़ा। कई अभ्यर्थियों ने बताया कि अब पढ़ाई में पहले जैसी एकाग्रता नहीं बन पा रही है। नींद की समस्या, मानसिक थकान और भविष्य को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।
कक्षा 12 की परीक्षा और नीट-यूजी दोनों में शामिल हुई रिधिमा बंसल का कहना है कि परीक्षा देकर निकलने के बाद उन्हें पूरा भरोसा था कि उनका प्रदर्शन अच्छा रहा है और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिल सकता है। लेकिन परीक्षा रद्द होने की खबर ने उनकी सारी उम्मीदों को झटका दिया। उन्होंने बताया कि अब देर रात तक पढ़ाई करनी पड़ रही है और इसका असर उनकी दिनचर्या तथा मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
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वहीं 17 वर्षीय वैभवी का कहना है कि वह परिवार के साथ छुट्टियां मना रही थीं, तभी उन्हें परीक्षा रद्द होने की जानकारी मिली। इसके बाद पढ़ाई में दोबारा मन लगाना मुश्किल हो गया। उनका मानना है कि पहली परीक्षा और री-टेस्ट की घोषणा के बीच आए लंबे अंतराल ने तैयारी की लय तोड़ दी। अब उन्हें इस बात का भी डर है कि दोबारा होने वाली परीक्षा पहले से अधिक कठिन हो सकती है।
दो वर्षों से नीट की तैयारी कर रहीं माधुरी सुधीर शेलार ने कहा कि परीक्षा केंद्र से निकलते समय उन्हें लगा था कि उनकी मेहनत रंग लाई है। खासकर जीवविज्ञान का पेपर अच्छा गया था। लेकिन बाद में परीक्षा रद्द होने की खबर ने उनका आत्मविश्वास कमजोर कर दिया। हालांकि वह अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयारी जारी रखे हुए हैं।
नीट-यूजी परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी, लेकिन पेपर लीक के आरोपों के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने 12 मई को इसे रद्द कर दिया। मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है। दोबारा परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी।
मनोवैज्ञानिक भावना बरमी का कहना है कि छात्रों को फिलहाल उन बातों पर ध्यान देना चाहिए जो उनके नियंत्रण में हैं। उन्होंने माइंडफुलनेस, नियमित दिनचर्या और छोटे-छोटे अध्ययन लक्ष्य तय करने की सलाह दी है, ताकि चिंता को कम किया जा सके।
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दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष अपराजिता गौतम का मानना है कि परीक्षा विवाद ने छात्रों और अभिभावकों के बीच अविश्वास की भावना को बढ़ाया है। उनके अनुसार जिन छात्रों का प्रदर्शन अच्छा रहा था, वे सबसे अधिक दबाव महसूस कर रहे हैं क्योंकि उनके मन में बार-बार यह सवाल उठ रहा है कि क्या वे दोबारा भी उतना ही अच्छा प्रदर्शन कर पाएंगे।
उन्होंने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में भरोसा तभी लौटेगा जब गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ पारदर्शी और प्रभावी कार्रवाई दिखाई देगी। उनका मानना है कि केवल गिरफ्तारियों की खबर पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को यह भी पता चलना चाहिए कि दोषियों के खिलाफ आगे क्या कदम उठाए गए।
विशेषज्ञों का कहना है कि री-नीट केवल एक परीक्षा नहीं रह गई है, बल्कि यह हजारों छात्रों के धैर्य, मानसिक मजबूती और भरोसे की भी परीक्षा बन गई है। ऐसे में परीक्षा के साथ-साथ छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है।