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युद्ध टला या रणनीति बदली? ट्रंप के बयान से मध्य एशिया तनाव में नया मोड़

ईरान के साथ बातचीत में प्रगति का दावा, सीजफायर विस्तार की चर्चा तेज

By श्वेता सिंह

Jun 11, 2026 23:38 IST

वाशिंगटनः अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित सैन्य हमले को लेकर दिए गए अपने हालिया बयानों को वापस ले लिया है। गुरुवार को उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान पर नए सैन्य हमले की योजना फिलहाल रोक दी गई है, जबकि कुछ घंटे पहले ही उन्होंने तनाव बढ़ाने के संकेत दिए थे।

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि ईरान के साथ बातचीत अब “उच्चतम स्तर” तक पहुंच चुकी है और इसे ईरानी नेतृत्व की मंजूरी भी मिल गई है।

ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि ईरान, इजरायल और अन्य क्षेत्रीय सहयोगियों के बीच चल रही बातचीत में प्रगति हुई है। उनके अनुसार, “डिस्कशंस और अंतिम बिंदुओं” पर सहमति बन चुकी है, हालांकि उन्होंने इसकी विस्तृत जानकारी साझा नहीं की।

पिछले कुछ हफ्तों में ट्रंप कई बार यह दावा कर चुके हैं कि युद्धरत पक्ष किसी समझौते के बेहद करीब हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समझौता सामने नहीं आया है। इस वजह से स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।

फिलहाल सैन्य कार्रवाई टलने के संकेत ने कुछ राहत जरूर दी है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक बातचीत की दिशा पर दुनिया की नजरें बनी हुई हैं।

हालांकि कुछ घंटों पहले ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि गुरुवार रात ईरान के खिलाफ “बहुत गंभीर” सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ ही उन्होंने खर्ग द्वीप पर नियंत्रण स्थापित करने की भी बात कही थी।

हालांकि इस बयान के बाद, ईरान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

खर्ग द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां स्थित टर्मिनल के जरिए देश का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का निर्यात अंतरराष्ट्रीय बाजारों में किया जाता है।

इसी कारण विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र के आसपास किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर डाल सकती है।

ट्रंप पर लंबे समय से खर्ग द्वीप को लेकर रणनीतिक रुचि रखने के आरोप और दावे सामने आते रहे हैं। इस बार के बयान में भी उन्होंने सैन्य अभियान के दौरान कुछ लक्ष्यों को लेकर अलग रुख का संकेत दिया है।

अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार, खर्ग द्वीप जैसे ऊर्जा केंद्र को लेकर किसी भी बड़ी सैन्य कार्रवाई का असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से शिपिंग और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

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