नई दिल्लीः कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को लेकर दुनिया भर में यह बहस जारी है कि क्या यह तकनीक इंसानों की नौकरियां छीन लेगी। लेकिन माइक्रोसॉफ्ट इंडिया डेवलपमेंट सेंटर (IDC) के प्रबंध निदेशक एवं अध्यक्ष राजीव कुमार का मानना है कि एआई रोजगार के अवसरों को कम नहीं करेगा, बल्कि काम करने के तरीकों और नौकरी की प्रकृति को बदलते हुए नए अवसर पैदा करेगा।
उन्होंने कहा कि इतिहास में जब भी कोई बड़ी तकनीकी क्रांति आई है, शुरुआत में रोजगार को लेकर आशंकाएं जरूर पैदा हुई हैं, लेकिन समय के साथ उन तकनीकों ने नए उद्योग, नई भूमिकाएं और रोजगार के नए अवसर भी तैयार किए हैं। एआई भी उसी दिशा में बढ़ती हुई तकनीक है।
तेजी से बदल रही है कौशल की दुनिया
राजीव कुमार के अनुसार तकनीकी बदलाव अब पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज गति से हो रहे हैं। इसका असर यह है कि आज जो कौशल प्रासंगिक हैं, उनकी उपयोगिता कुछ वर्षों में बदल सकती है। इसलिए केवल एक बार सीखी गई जानकारी के भरोसे पूरा करियर निकालना अब संभव नहीं होगा।
उन्होंने विश्व आर्थिक मंच की 'फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2025' का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2030 तक वैश्विक स्तर पर लगभग 39 प्रतिशत प्रमुख नौकरी संबंधी कौशल बदल जाएंगे। भारत में यह चुनौती और बड़ी है, जहां लगभग 63 प्रतिशत कर्मचारियों को अपस्किलिंग या रिस्किलिंग की आवश्यकता पड़ेगी।
युवा इंजीनियरों के लिए सबसे जरूरी है 'सीखना'
राजीव कुमार का कहना है कि आने वाले समय में सबसे मूल्यवान क्षमता लगातार सीखते रहने की होगी। उनके अनुसार युवा इंजीनियरों को किसी एक तकनीक तक सीमित रहने के बजाय खुद को नई परिस्थितियों के अनुरूप ढालने की आदत विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भविष्य में सफलता उन्हीं लोगों को मिलेगी जो बदलाव को स्वीकार करेंगे और नए कौशल सीखने में पीछे नहीं रहेंगे। "लर्न टू लर्न" यानी सीखने की कला सीखना आने वाले समय की सबसे बड़ी पेशेवर ताकत बन सकती है।
एआई के साथ सहयोग की सोच बढ़ रही
माइक्रोसॉफ्ट अधिकारी के अनुसार अब इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्र में चर्चा केवल इस बात पर नहीं हो रही कि एआई इंसानों की जगह ले लेगा। इसके बजाय युवा पेशेवर यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि इस तकनीक का उपयोग करके अपनी क्षमता को कैसे बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने 1995 के इंटरनेट युग का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी कई लोगों को लगा था कि तकनीक पारंपरिक नौकरियों को खत्म कर देगी, लेकिन बाद में उसी तकनीक ने पूरी दुनिया में नए रोजगार और व्यवसाय खड़े कर दिए।
भारतीय कंपनियों में उभर रही हैं नई भूमिकाएं
राजीव कुमार ने बताया कि एआई के विस्तार के साथ नई तरह की नौकरियां सामने आने लगी हैं। एआई ट्रेनर, एजेंट स्पेशलिस्ट, एआई सुरक्षा विशेषज्ञ और एआई आधारित समाधान विकसित करने वाले पेशेवरों की मांग बढ़ रही है।
उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में ऐसे कई नए पेशे सामने आएंगे जिनकी आज पूरी कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसलिए अवसरों की कमी नहीं होगी, बल्कि जरूरत सही कौशल और तैयारी की होगी।
भर्ती का तरीका भी बदल रहा है
उन्होंने कहा कि कंपनियां अब केवल डिग्री या शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर भर्ती नहीं कर रहीं। नियोक्ता ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रहे हैं जिनमें नई चीजें सीखने, समस्याओं को हल करने और बदलती परिस्थितियों में काम करने की क्षमता हो।
यही कारण है कि कौशल आधारित भर्ती (स्किल-बेस्ड हायरिंग) का चलन लगातार बढ़ रहा है।
इंसानी समझ की जगह नहीं ले सकता एआई
राजीव कुमार ने माइक्रोसॉफ्ट की 'वर्क ट्रेंड इंडेक्स 2026' रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया भर के अधिकांश एआई उपयोगकर्ताओं का अनुभव सकारात्मक रहा है। उनका मानना है कि एआई ने उन्हें अधिक महत्वपूर्ण और रचनात्मक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर दिया है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एआई केवल एक उपकरण है। यह कोड लिख सकता है, डेटा का विश्लेषण कर सकता है और सुझाव दे सकता है, लेकिन किसी संगठन का लक्ष्य तय करना, ग्राहक की जरूरतों को समझना, नैतिक निर्णय लेना और मानवीय संवेदनाओं को पहचानना अभी भी इंसानों की जिम्मेदारी है।
उनके अनुसार अनुभव, विवेक, नैतिकता और सहानुभूति जैसी खूबियां ही पेशेवरों को अलग पहचान दिलाती हैं।
भारत के पास है वैश्विक नेतृत्व का अवसर
राजीव कुमार ने कहा कि भारत के पास दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रतिभा है। इसके साथ ही देश में डिजिटल तकनीकों को तेजी से अपनाने और बड़े पैमाने पर नवाचार करने की क्षमता भी मौजूद है।
उन्होंने हैदराबाद स्थित माइक्रोसॉफ्ट इंडिया डेवलपमेंट सेंटर का उदाहरण देते हुए कहा कि यह अमेरिका के बाहर कंपनी का सबसे बड़ा अनुसंधान एवं विकास केंद्र है। यहां भारतीय इंजीनियर केवल तकनीक का उपयोग नहीं कर रहे, बल्कि वैश्विक स्तर के उत्पादों और समाधानों को विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उनका मानना है कि यदि भारत का कार्यबल लगातार सीखने और नई तकनीकों को अपनाने पर जोर देता है, तो एआई के युग में देश वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दौड़ में और मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।
भविष्य की तैयारी आज से
राजीव कुमार का संदेश स्पष्ट है कि एआई को खतरे के रूप में देखने के बजाय अवसर के रूप में समझना होगा। तकनीक बदल रही है, नौकरियों का स्वरूप बदल रहा है, लेकिन सीखने की इच्छा और अनुकूलन की क्षमता रखने वालों के लिए संभावनाएं पहले से कहीं अधिक हैं।