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'टीएमसी और ममता जी के साथ था, हूं और रहूंगा', शत्रुघ्न सिन्हा ने अटकलों पर लगाया विराम

बागी खेमे में शामिल होने की अटकलों को किया खारिज। कहा- राजनीति में रिश्ते और भरोसा भी मायने रखते हैं।

By श्वेता सिंह

Jun 11, 2026 19:05 IST

कोलकाताः तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी राजनीतिक संकट और टूट की चर्चाओं के बीच पार्टी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि वह किसी भी परिस्थिति में ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ेंगे, क्योंकि जब उनके राजनीतिक जीवन में कठिन दौर आया था तब ममता बनर्जी उनके साथ खड़ी थीं।

आसनसोल से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि उनके लिए राजनीति केवल पद और अवसर का विषय नहीं है, बल्कि रिश्तों, विश्वास और नैतिक जिम्मेदारी का भी सवाल है।

"मैंने खुद को तीन लाइन का व्हिप जारी किया है"

शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने अंदाज में कहा कि उन्होंने खुद को तीन लाइन का व्हिप जारी किया है-वह टीएमसी के साथ थे, टीएमसी के साथ हैं और आगे भी टीएमसी के साथ ही रहेंगे। उन्होंने साफ किया कि कहीं और जाने का उनका कोई इरादा नहीं है।

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उनके बागी खेमे में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थीं।

कठिन समय की यादें आज भी हैं ताजा

शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद जब वह राजनीतिक रूप से कठिन दौर से गुजर रहे थे, तब बहुत कम लोग उनके साथ खड़े हुए थे। उनके अनुसार ममता बनर्जी उन चुनिंदा नेताओं में थीं जिन्होंने उस समय उनका समर्थन किया और भरोसा जताया।

उन्होंने कहा कि ऐसे अनुभव व्यक्ति को रिश्तों की कीमत समझाते हैं और यही कारण है कि आज जब ममता बनर्जी कठिन राजनीतिक परिस्थितियों का सामना कर रही हैं, तो उनका कर्तव्य बनता है कि वह उनके साथ खड़े रहें।

दोस्ती अलग, राजनीतिक निष्ठा अलग

हाल के दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शुभकामनाएं देने वाली उनकी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं हुईं। इस पर शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों में उनके मित्र हैं और व्यक्तिगत संबंधों का सम्मान करना उनकी आदत है।

हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि मित्रता और राजनीतिक निष्ठा दो अलग बातें हैं। उन्होंने कहा कि उनका राजनीतिक रास्ता फिलहाल पूरी तरह स्पष्ट है और वह टीएमसी के साथ बने रहेंगे।

बागी खेमे के न्योते को भी ठुकराया

शत्रुघ्न सिन्हा ने स्वीकार किया कि उन्हें बागी समूह की ओर से संपर्क किया गया था, लेकिन उन्होंने उस रास्ते पर जाने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि सिद्धांतों के आधार पर लिया गया निर्णय ही लंबे समय तक टिकता है।

उन्होंने कहा कि टीएमसी के चुनाव चिह्न पर जीत हासिल करने के बाद पार्टी और उसके नेतृत्व के प्रति उनकी जिम्मेदारी भी बनती है।

संकट में घिरी है तृणमूल कांग्रेस

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी संगठनात्मक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। पार्टी के कई विधायक और सांसद नेतृत्व से अलग रुख अपनाते दिखाई दिए हैं। ऐसे समय में शत्रुघ्न सिन्हा का खुलकर ममता बनर्जी के समर्थन में आना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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भरोसे और निष्ठा की राजनीति

राजनीति में दल बदल और समीकरण बदलने की घटनाएं आम मानी जाती हैं, लेकिन शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने बयान में निष्ठा और व्यक्तिगत भरोसे को प्राथमिकता दी है। उनका संदेश यह है कि राजनीतिक मतभेदों और संकटों के बीच भी कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो केवल सत्ता की राजनीति से तय नहीं होते।

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