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फुटपाथों से हटेंगे अवैध कब्जे, हॉकर्स के पुनर्वास पर विचार करेगी सरकार: शुभेंदु अधिकारी

हॉकर्स को हटाने के विरोध के बीच सरकार ने पुनर्वास और कल्याणकारी योजनाओं का दिया संकेत।

By श्वेता सिंह

Jun 12, 2026 15:46 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हॉकर्स को लेकर राज्य सरकार का रुख स्पष्ट कर दिया है। न्यू टाउन स्थित विश्व बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में आयोजित एक पत्रकार सम्मेलन में उन्होंने साफ कहा कि फुटपाथ और सार्वजनिक रास्तों पर स्थायी कब्जे की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती। हालांकि इसके साथ ही उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि आजीविका से जुड़े लोगों के हितों की रक्षा के लिए सरकार पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी काम करेगी।

जनहित सर्वोपरि, फुटपाथों पर कब्जे की नहीं होगी अनुमति

मुख्यमंत्री ने कहा कि फुटपाथों का निर्माण आम लोगों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही के लिए किया जाता है। ऐसे में सार्वजनिक सुविधाओं को प्रभावित करने वाले अतिक्रमण को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनके अनुसार, सरकार की पहली जिम्मेदारी नागरिकों के हितों की रक्षा करना है और इसी सिद्धांत के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां जनता की जरूरतों से जुड़ी जमीन पर अवैध कब्जा है, वहां कार्रवाई जारी रहेगी। हालांकि जिन स्थानों पर सरकारी खाली या अनुपयोगी भूमि उपलब्ध है और जहां जनहित प्रभावित नहीं होता, वहां मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की संभावना पर विचार किया जा सकता है।

बड़े शहरों में अतिक्रमण बना चुनौती

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से कोलकाता के भीड़भाड़ वाले इलाकों का जिक्र करते हुए कहा कि कई जगह सड़कें और फुटपाथ इतने अधिक घिर चुके हैं कि लोगों की आवाजाही तक प्रभावित हो रही है। न्यू मार्केट, राजाबाजार और मेटियाबुरुज जैसे क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर मोटरसाइकिल निकालना भी मुश्किल हो जाता है।

सरकार का मानना है कि ऐसी स्थिति लंबे समय तक नहीं चल सकती और सार्वजनिक स्थानों को उनके मूल उद्देश्य के लिए सुरक्षित रखना आवश्यक है।

हॉकर्स की आर्थिक भूमिका को भी स्वीकार किया

मुख्यमंत्री ने यह भी माना कि राज्य की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में हॉकर्स की महत्वपूर्ण भूमिका है। कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग इस व्यवसाय से जुड़े हैं और हजारों परिवारों की आजीविका इससे चलती है।

इसी कारण सरकार केवल हटाने की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि एक संतुलित समाधान तलाशने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है।

पुनर्वास और विशेष योजना की तैयारी

हॉकर्स के भविष्य को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि श्रम विभाग के माध्यम से विशेष योजना लाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का भी अध्ययन किया जा रहा है ताकि जरूरतमंद लोगों को संगठित और कानूनी ढांचे के भीतर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जा सकें।

सरकार का विचार है कि जहां संभव हो, वहां सरकारी खाली या अनुपयोगी जमीनों पर वैकल्पिक व्यवस्था और पुनर्वास की संभावनाओं को तलाशा जाए।

हाल के अभियानों ने बढ़ाई बहस

राज्य में हाल के महीनों में अतिक्रमण हटाने की कई बड़ी कार्रवाइयां हुई हैं। हावड़ा और सियालदह स्टेशन समेत विभिन्न इलाकों में अवैध स्टॉल और कब्जों के खिलाफ अभियान चलाए गए हैं। इन कार्रवाइयों को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हुई है और विपक्षी दलों ने सरकार की आलोचना की है।

हालांकि सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई किसी वर्ग विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुविधाओं को बहाल करने के लिए की जा रही है।

विकास और आजीविका के बीच संतुलन की कोशिश

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के बयान से यह संकेत मिला है कि सरकार दोहरे लक्ष्य पर काम करना चाहती है। एक ओर सड़कों और फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त बनाना, वहीं दूसरी ओर हॉकर्स और छोटे कारोबारियों की आजीविका को सुरक्षित रखना।

सरकार का दावा है कि आने वाले समय में पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर ठोस कदम उठाए जाएंगे। अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रस्तावित योजनाओं को जमीन पर किस तरह लागू किया जाता है और हॉकर्स के लिए क्या नया मॉडल सामने आता है।

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