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रिटेल डीजल बिक्री पर सख्त नियम, 90 दिन के लिए नई व्यवस्था लागू

रिटेल आउटलेट्स से केवल वाहन टैंक या PESO-अप्रूव्ड कंटेनर में 200 लीटर तक डीजल मिलेगा।

By प्रियंका महतो

Jun 12, 2026 16:58 IST

नई दिल्ली : नई दिल्ली में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ‘मोटर स्पिरिट और हाई-स्पीड डीजल (रिटेल आउटलेट्स के माध्यम से आपूर्ति का अस्थायी विनियमन) आदेश, 2026’ को अधिसूचित किया है। इस आदेश का उद्देश्य असामाजिक तत्वों द्वारा डीजल की कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाना है।

मंत्रालय के अनुसार यह नियम अस्थायी प्रकृति के हैं, जो प्रारंभिक रूप से 90 दिनों तक प्रभावी रहेंगे, ताकि देशभर में सभी खुदरा उपभोक्ताओं के लिए डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

वर्तमान स्थिति में कुछ खुदरा आउटलेट्स पर असामान्य रूप से मांग बढ़ने की स्थिति देखी गई है। यह मुख्य रूप से उन औद्योगिक, संस्थागत और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के कारण हुआ है, जिन्होंने अपने निर्धारित बल्क डीजल पंपों की बजाय रिटेल आउटलेट्स से खरीदारी शुरू कर दी है। इसका कारण बल्क और रिटेल डीजल कीमतों में अंतर बताया गया है।

इसके अलावा निजी तेल विपणन कंपनियों की बिक्री में मई 2026 के दौरान लगभग 58 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिसके चलते सरकारी क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (पीएसयू ओएमसी) पर दबाव बढ़ा है। आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 327 जिलों में डीजल बिक्री में 10 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई, जबकि 80 जिलों में यह वृद्धि 30 प्रतिशत से भी अधिक रही।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये नए नियम सामान्य खुदरा उपभोक्ताओं पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं डालेंगे। आम वाहन चालकों के लिए 200 लीटर की दैनिक सीमा व्यावहारिक रूप से बहुत अधिक है और इससे किसी प्रकार की असुविधा नहीं होगी।

इन उपायों का मुख्य उद्देश्य बड़े और बल्क उपभोक्ताओं को खुदरा आउटलेट्स से डीजल खरीदकर मूल्य अंतर का अनुचित लाभ लेने से रोकना है। सरकार को यह भी जानकारी मिली है कि बड़ी मात्रा में जरीकेनों में डीजल खरीदकर उसकी पुनर्विक्रय की घटनाएं सामने आई हैं। इस आदेश के तहत ऐसे खरीदारों, संचालकों, डीलरों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी जो इस प्रकार की कालाबाजारी और जमाखोरी में शामिल पाए जाएंगे।

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि रिटेल आउटलेट्स से बल्क उपभोक्ताओं को ईंधन की आपूर्ति पर रोक लगाकर सामान्य उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

वर्तमान पश्चिम एशिया संकट के दौरान उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी पर प्रतिदिन लगभग 500 करोड़ रुपये का घाटा वहन कर रही हैं। यह मूल्य समर्थन घरेलू उपभोक्ताओं, किसानों और सामान्य उपयोगकर्ताओं की राहत के लिए है, जबकि औद्योगिक और बल्क आपूर्ति में अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार मूल्य निर्धारण जारी है।

मंत्रालय के अनुसार बल्क उपभोक्ताओं द्वारा हाई-स्पीड डीजल (एचएसडी) के डायवर्जन से स्थानीय स्तर पर आपूर्ति बाधित होने और आवश्यक सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका उत्पन्न हो रही थी।

आदेश के तहत केंद्रीय सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों—इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड—को निर्देश दिया है कि रिटेल आउटलेट्स केवल वाहनों के टैंक या पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) द्वारा अनुमोदित कंटेनरों में ही डीजल की आपूर्ति करें। प्रत्येक वाहन या उपभोक्ता के लिए दैनिक सीमा 200 लीटर निर्धारित की गई है।

इसके साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि रिटेल आउटलेट से खरीदे गए डीजल की पुनर्विक्रय प्रतिबंधित होगी और औद्योगिक, संस्थागत एवं वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को रिटेल आउटलेट्स से डीजल खरीदने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें अपनी आवश्यकताओं के लिए निर्धारित बल्क पंपों से ही आपूर्ति प्राप्त करनी होगी।

तेल विपणन कंपनियों और रिटेल आउटलेट डीलरों को इन नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को भी कालाबाजारी या अनधिकृत डायवर्जन जैसी गतिविधियों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश का उल्लंघन आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 सहित अन्य लागू कानूनों के तहत दंडनीय होगा।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश किसी प्रकार की राशनिंग नहीं है और देश में पेट्रोल या डीजल की कोई कमी नहीं है। भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पेट्रोलियम उत्पादों का पाँचवां सबसे बड़ा निर्यातक है। सरकार ने कहा है कि वह ऊर्जा सुरक्षा, उपभोक्ता हित और निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर आवश्यक कदम उठाती रहेगी।

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