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ओमान तट पर जहाजों पर हमले के बाद भारत का कड़ा रुख, अमेरिकी राजनयिक को दूसरी बार किया तलब

तीन भारतीय नाविकों की मौत से बढ़ा तनाव, व्यापारिक जहाजों पर हमलों पर भारत ने जताया कड़ा विरोध।

By रजनीश प्रसाद

Jun 12, 2026 17:03 IST

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ओमान की खाड़ी और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास भारतीय नाविकों से जुड़े वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार हुए हमलों को लेकर भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। अमेरिका द्वारा इन हमलों में अपनी भूमिका स्वीकार करने के बाद नई दिल्ली ने अमेरिकी चार्ज डी'अफेयर्स जेसन मीक्स को एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार तलब कर अपनी आपत्ति और चिंता दर्ज कराई है।

विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि ओमान तट और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास चलने वाले व्यापारिक जहाजों पर बार-बार हमले बेहद चिंताजनक हैं। खासकर इन जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक कार्यरत होने के कारण उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है। इसी वजह से अमेरिकी राजनयिक को बुलाकर भारत का आधिकारिक विरोध दर्ज कराया गया।

इससे पहले 10 जून को भी भारत सरकार ने जेसन मीक्स को तलब कर इस मामले में औपचारिक राजनयिक आपत्ति (डेमार्शे) सौंपी थी। उस समय तीन भारतीय नाविक लापता थे लेकिन बाद में उनकी मौत की पुष्टि होने के बाद भारत ने अपना कूटनीतिक दबाव और बढ़ा दिया।

इस सप्ताह ओमान तट के पास भारतीय नाविकों वाले तीन अलग-अलग व्यापारिक जहाजों पर मिसाइल हमले हुए। रिपोर्ट के अनुसार इन सभी हमलों के पीछे अमेरिकी सेना की भूमिका रही। विशेष रूप से एमटी जलवीर और एमटी सेत्तेबेलो पर हुए हमलों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। पलाऊ के झंडे वाले एमटी सेत्तेबेलो पर 24 भारतीय नाविक सवार थे। हमले के बाद 21 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया जबकि तीन भारतीय नाविक लापता हो गए थे जिनकी बाद में मौत की पुष्टि हुई।

मृतकों की पहचान मुख्य अभियंता पत्नाला सुरेश, डेक कैडेट आदित्य शर्मा और फिटर शिवानंद चौरसिया के रूप में हुई है। उनकी मौत से पूरे देश में नाराजगी का माहौल है। भारत सरकार ने इस घटना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए वाणिज्यिक जहाजों पर हमले तुरंत रोकने की मांग की है।

इसी बीच अमेरिका के रक्षा बलों की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक रूप से स्वीकार किया कि ओमान तट के पास ‘एमटी जलवीर’ नामक व्यापारिक जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाकर दो शक्तिशाली हेलफायर मिसाइलें दागी गई थीं।

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर व्यापारिक जहाजों और नागरिक ढांचे पर हमले स्वीकार्य नहीं हैं। भारत ने तत्काल तनाव कम करने, कूटनीतिक बातचीत के जरिए संकट का समाधान निकालने और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर सुरक्षित एवं निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करने की अपील की है। साथ ही मालवाहक जहाजों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा भी की गई है।

कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत और अमेरिका के रणनीतिक संबंध मजबूत होने के बावजूद नई दिल्ली ने स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय नागरिकों की जान जाने के मामले में किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। कुछ ही दिनों के भीतर एक ही अमेरिकी राजनयिक को दो बार तलब किया जाना भारत के सख्त रुख का संकेत माना जा रहा है।

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