वॉशिंगटन/नयी दिल्लीः दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय तनाव का केंद्र बन गया है। भारतीय नाविकों की मौत और वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक स्तर पर तीखी बातचीत हुई है। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक समुद्री व्यापार को लेकर भी नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में लागू अमेरिकी नाकाबंदी का किसी भी स्तर पर उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरानी तेल के कथित अवैध परिवहन में शामिल गतिविधियों पर अमेरिका कड़ा रुख अपनाए हुए है और ऐसे मामलों में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
यह संदेश ऐसे समय सामने आया है जब भारत ने ओमान तट के निकट अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में भारतीय नागरिकों की मौत को लेकर गहरी नाराजगी जताई है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मार्को रुबियो से बातचीत कर इस घटना पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया और कहा कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने वाली घातक सैन्य कार्रवाई को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
अमेरिकी पक्ष ने क्या कहा?
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट के अनुसार, रुबियो ने बातचीत के दौरान इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज क्षेत्र से गुजरने वाले सभी व्यापारिक जहाज अमेरिकी बलों के निर्देशों का तत्काल पालन करें। उनका कहना था कि अमेरिकी नौसैनिक बल समुद्री मार्ग में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए तैनात हैं और किसी भी जहाज को निर्धारित नियमों की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।
अमेरिका ने 13 अप्रैल से होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान से जुड़े समुद्री व्यापार पर कड़ी निगरानी और नाकाबंदी लागू कर रखी है। वाशिंगटन का दावा है कि यह कदम ईरान को तेल निर्यात से मिलने वाली आय को सीमित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
भारतीय नाविकों की मौत से बढ़ा विवाद
इस सप्ताह ओमान के तट के पास भारतीय चालक दल वाले तीन जहाज हमलों की चपेट में आए। इनमें से एक हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। घटना के बाद भारत सरकार ने तत्काल अमेरिकी प्रशासन से जवाब तलब किया और इसे गंभीर मामला बताया।
नई दिल्ली ने अमेरिकी प्रभारी राजदूत जेसन मीक्स को विदेश मंत्रालय में तलब कर स्पष्ट किया कि भारतीय चालक दल वाले वाणिज्यिक जहाजों पर घातक सैन्य कार्रवाई किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। भारत का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर चल रहे व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है।
ट्रंप के बयान से और बढ़ा तनाव
घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया दावा करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से निकल रहे भारतीय जहाजों पर हुए ड्रोन हमलों के पीछे ईरान का हाथ हो सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर इसे पूरी तरह अस्वीकार्य बताया और ईरान को कड़ी चेतावनी दी।
हालांकि तेहरान ने इन आरोपों को तुरंत खारिज कर दिया। भारत स्थित ईरानी दूतावास ने कहा कि अमेरिका के आरोप तथ्यहीन हैं और उनका उद्देश्य वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाना है। दूतावास ने यह भी कहा कि पिछले कुछ दिनों में अमेरिकी कार्रवाई के कारण भारतीय जहाज प्रभावित हुए हैं और भारतीय नाविकों की जान गई है।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा और व्यापारिक समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार को प्रभावित कर सकता है।
फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद से इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ी है। इसके जवाब में ईरान ने भी कई जवाबी कदम उठाए। हालांकि 8 अप्रैल से युद्धविराम लागू है, लेकिन समुद्री क्षेत्र में तनाव और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
भारत की चिंता क्या है?
भारत की सबसे बड़ी चिंता अपने नागरिकों और समुद्री व्यापारिक हितों की सुरक्षा को लेकर है। बड़ी संख्या में भारतीय नाविक अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर कार्यरत हैं और होर्मुज मार्ग भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो इसका असर न केवल तेल आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर पड़ेगा, बल्कि भारत की सामरिक और आर्थिक चिंताएं भी बढ़ सकती हैं। इसलिए नई दिल्ली फिलहाल एक ओर अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दूसरी ओर सभी पक्षों से संवाद बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है।
कूटनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि भारतीय नाविकों की मौत के बाद शुरू हुआ यह विवाद आने वाले दिनों में भारत-अमेरिका संवाद का प्रमुख मुद्दा बन सकता है। वहीं हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यह क्षेत्र केवल पश्चिम एशिया ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक और सामरिक स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।