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60 चेतावनियां, फ्लेयर, रेडियो संदेश... पर नहीं रुका जहाज, अमेरिका का दावा - पहले चेताया, फिर उठाया बड़ा कदम

बार-बार चेतावनी देने के बावजूद अमेरिकी सेना के निर्देशों की अनदेखी करते हुए पलाऊ का मालवाहक जहाज आगे बढ़ता रहा।

By Elina Dutta, Moumita Bhattacharya

Jun 15, 2026 10:54 IST

ओमान तट के पास MT Settobella नामक वाणिज्यिक जहाज पर अमेरिकी सैन्य हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका को तीखी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ रहा है। घटना के बाद अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि हमले से पहले जहाज को लगभग 60 बार चेतावनी संदेश भेजे गए थे।

बार-बार चेतावनी देने के बावजूद अमेरिकी सेना के निर्देशों की अनदेखी करते हुए पलाऊ का मालवाहक जहाज आगे बढ़ता रहा। इसके बाद उसे रोकने के लिए मिसाइल दागी गई। इसी घटना में तीन भारतीयों की मौत हो गई।

इतना ही नहीं। मीडिया रिपोर्ट्स में अमेरिकी सेना के हवाले से दावा किया जा रहा है कि तेल टैंकर MT Settebello भी उनके घोषित नाकेबंदी की अवहेलना करते हुए आगे बढ़ रहा था। उस पर ईरानी तेल के परिवहन में शामिल होने का भी संदेह था। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि जहाज को कई बार निर्देश दिए गए लेकिन उसने न तो उन निर्देशों का पालन किया और न ही बार-बार भेजी गई चेतावनियों का कोई जवाब दिया।

जहाज को अनेक रेडियो संदेश भी भेजे गए। इतना ही नहीं अमेरिका ने हवाई मार्ग से भी जहाज को कई चेतावनी संकेत भेजे और जहाज को अपना रास्ता बदलने के लिए कहा। जब इसका भी कोई असर नहीं हुआ तब मिसाइल दागी गई।

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अमेरिकी सेना का दावा है कि मिसाइल दागने से पहले अंतिम चेतावनी भी जारी की गई थी। उनका कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य केवल जहाज की परिचालन क्षमता को निष्क्रिय करना था। हालांकि इस मिसाइल हमले में कई लोगों की मौत हो गयी है।

60 बार क्या चेतावनी दी गयी थी?

एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से दावा किया जा रहा है कि -

  1. जहाज को कई बार रेडियो संदेश भेजे गए।
  2. सैन्य विमानों द्वारा फ्लाई-पास्ट (नीचे उड़ान भरकर चेतावनी देना) किया गया और सिग्नल फ्लेयर का भी इस्तेमाल किया गया।
  3. अंतिम चरण में दो बार और अंतिम चेतावनी दी गई।
  4. इसके बाद जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाकर सटीक हमला किया गया।

दावा किया गया है कि हमले से पहले क्रू को इंजन रूम खाली करने के लिए पर्याप्त समय भी दिया गया था।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन सभी चेतावनियों के बावजूद जहाज ने न तो अपना रास्ता बदला और न ही निर्देशों का पालन किया। इसके बाद ही मिसाइल दागने का फैसला लिया गया।

गौरतलब है कि अमेरिकी हमले के बाद स्थिति बेहद गंभीर हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार जहाज पर कार्यरत कुल 24 भारतीय नाविकों में से तीन की मृत्यु हो गई। बाकी नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया। भारत सरकार ने इस घटना को अत्यंत चिंताजनक बताया है।

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विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कूटनीतिक प्रतिनिधि को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत का कहना है कि किसी वाणिज्यिक जहाज पर घातक सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए खतरनाक है और ऐसी घटनाओं को तुरंत रोका जाना चाहिए।

इस घटना के बाद भारतीय नाविक संगठनों के बीच भी चिंता बढ़ने लगी है। उनका मानना है कि समुद्री मार्गों पर बढ़ते सैन्य तनाव से भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

उठ रहे हैं कई सवाल

इस घटना को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि जहाज ने चेतावनियों की अनदेखी की। लेकिन जहाज का संचालन करने वाली कंपनी ने अमेरिकी सेना के इस दावे पर सवाल उठाए हैं और मामले की निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है।

फिलहाल घटना की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निष्पक्ष जांच की मांग तेज होती जा रही है।

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