मस्कट : एक युवा भारतीय नाविक की मृत्यु के तीन दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उसका पार्थिव शरीर अब भी जहाज पर पड़ा हुआ है। आपात आधार पर अनुरोध किए जाने के बाद भी शव को नहीं हटाया गया है। आरोप है कि सहकर्मी ठंडे पानी की बोतलों का सहारा लेकर शव को खराब होने से बचाने की कोशिश कर रहे हैं। इस दर्दनाक और चिंताजनक स्थिति को लेकर भारतीय नाविकों के अंतरराष्ट्रीय संगठन ‘फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया’ (एफएसयूआई) ने रविवार को गंभीर सवाल उठाए।
जानकारी के अनुसार ओमान के दुक्म बंदरगाह पर खड़े टैंकर ‘एमटी सेलेस्टियल’ पर 11 जून को भारतीय नाविक निशांत वीरथान्थन (35) की तबीयत बिगड़ने के बाद मृत्यु हो गई थी। निशांत तमिलनाडु के निवासी थे। संगठन का आरोप है कि जहाज प्रबंधन और मालिक पक्ष की लापरवाही के कारण यह मौत हुई। एफएसयूआई का कहना है कि मृत्यु के बाद की प्रक्रिया में भी अत्यधिक ढिलाई बरती जा रही है और सरकारी स्तर पर आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक शव को जहाज से नहीं हटाया गया है।
संगठन द्वारा जारी एक वीडियो में कथित रूप से देखा जा सकता है कि प्लास्टिक शीट में लिपटे शव को ठंडे पानी की बोतलों के सहारे सुरक्षित रखने का प्रयास किया जा रहा है। इस स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे है कि इस तरह की व्यवस्था आखिर कितनी देर तक कारगर रह सकती है। साथ ही जहाज पर मौजूद अन्य कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है।
एफएसयूआई ने सोशल मीडिया मंच (X) पर मस्कट स्थित भारतीय दूतावास को टैग करते हुए लिखा कि कई घंटे बीत जाने के बाद भी शव को ले जाने के लिए कोई नाव नहीं पहुंची है। यह बयान उस आश्वासन के बाद सामने आया है जिसमें ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने नाविक की मृत्यु की पुष्टि करते हुए संबंधित सभी पक्षों से संपर्क कर शव को शीघ्र भारत भेजने की बात कही थी।
शनिवार को भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी थी कि निशांत वीरथान्थन के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत भेजने की व्यवस्था की जा रही है। गौरतलब है कि निशांत की मृत्यु से पहले ओमान के निकट तीन अन्य भारतीय नाविकों की भी मौत हुई थी। उन घटनाओं को लेकर पहले से ही चर्चा और चिंता का माहौल बना हुआ है। इसी पृष्ठभूमि में यह नया मामला सामने आने के बाद विषय ने और अधिक गंभीरता हासिल कर ली है तथा इस पर भारत सरकार भी सक्रिय हुई है।