आज के समय जब वयस्कों और युवाओं का ही स्क्रीन टाइम इतना बढ़ गया है तो छोटे बच्चों को मोबाइल और स्क्रीन से दूर रखना भी बेहद मुश्किल भरा काम होता है। अभिभावकों का दावा होता है कि विशेष रूप से खाना खाते वक्त छोटे बच्चे मोबाइल छोड़ना ही नहीं चाहते।
यह मुश्किल खासतौर पर नौकरीपेशा और कामकाजी अभिभावकों के लिए और भी ज्यादा होती है। कई बच्चे तो मोबाइल या टीवी देखे बिना खाना खाने से ही सीधे तौर पर इनकार कर देते हैं। वहीं कुछ बच्चे खाना देखते ही तब तक तरह-तरह के बहाने बनाते हैं जब तक उनके सामने मोबाइल पर कोई वीडियो न चलाया जाए।
लेकिन थोड़ी धैर्य और सही आदतें विकसित करने से बच्चे को आसानी से खाने के प्रति रुचि दिलाई जा सकती है और सबसे अच्छी बात है कि इसके लिए बच्चों को मोबाइल देने या दिखाने की बिल्कुल जरूरत नहीं होती।
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खुद से खाने के लिए छोड़े
अक्सर अभिभावक यह सोचते हैं कि अगर बच्चे को खुद खाने दिया जाए तो वह खाना बर्बाद करेगा। समय भी ज्यादा लगेगा, चारों तरफ खाना फैलाएगा और खाना भी पूरा नहीं खाएगा। इसलिए वे खुद ही बच्चे को खाना खिला देते हैं। लेकिन बच्चों को बचपन से ही खुद हाथ से खाना खाने की आदत सिखाना जरूरी है।
जब एक बच्चा खुद खाना उठाकर मुंह तक ले जाना सीखता है तो उसमें स्वतंत्रता और आत्मविश्वास विकसित होता है। साथ ही खाने के प्रति उसकी रुचि भी बढ़ती है। शुरुआत में थोड़ी गंदगी और अव्यवस्था हो सकती है लेकिन धीरे-धीरे बच्चा खाने का आनंद लेना सीख जाता है। इसलिए कितना भी ज्यादा समय क्यों न लगें, बच्चे को खुद से खाने के लिए कभी-कभी जरूर छोड़े।
परिवार के साथ बैठकर खाने की आदत लगाएं
बच्चे बड़ों को देखकर ही सीखते हैं। इसलिए जब पूरा परिवार एक साथ बैठकर खाना खाता है तब बच्चे के मन में भी खाने के प्रति रुचि विकसित होती है। अकेले बैठकर खाते समय बोर होकर बच्चा या तो खाना छोड़कर भागने की कोशिश करता है या फिर मोबाइल दिखाने की जिद्द करने लगता है।
जब वे माता-पिता या परिवार के अन्य सदस्य आनंदपूर्वक खाना खाते हुए देखते हैं तो वे भी उसी आदत को अपनाने लगते हैं। इसलिए हमेशा बच्चों को खाने के लिए परिवार के साथ ही बैठाने की कोशिश करें और खाने की मेज पर माहौल को खुशनुमा जरूर बनाएं।
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खाने का दबाव न डालें
अक्सर देखा जाता है कि बच्चे अगर तय समय में खाना खत्म नहीं करते हैं तो माता-पिता उन्हें बार-बार जल्दी करने या डांटने लगते हैं। इससे बच्चे के मन में खाने के प्रति नकारात्मक भावना विकसित हो सकती है। खासतौर पर टॉडलर बच्चों के मामले में जबरदस्ती खिलाने के बजाय खाने को एक आनंददायक अनुभव बनाने की कोशिश करनी चाहिए।
यदि बच्चा किसी दिन कम खाता है तो इसके लिए ज्यादा चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। बच्चे को नियमित रूप से पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराते रहें और बच्चे को अपनी भूख को समझने और पहचानने का अवसर दें।
बातें करें, कहानियां सुनाएं
मोबाइल, टैब या टीवी दिखाकर बच्चे को खाना खिलाने की आदत लंबे समय में नुकसानदायक हो सकती है। बच्चे का ध्यान खाने से हट जाता है। वह स्वाद, गंध आदि को पहचानने की कोशिश नहीं करता और खाना अच्छी तरह से चबा कर भी नहीं खाता। इससे भोजन के पोषक तत्वों का भी पूरा लाभ नहीं मिल पाता।
इसलिए खाने के समय बच्चों से बातें करें। उन्हें कहानियां सुनाएं, दिनभर की मजेदार घटनाओं पर चर्चा करें। इससे बच्चे का मन भी बहल जाएगा और वह खाने पर भी ध्यान देना शुरू कर देगा।