लगभग 4 सालों बाद हिमाचल प्रदेश और पंजाब के बीच चलने वाली नैरो गेज ट्रेन या यूं कहें टॉय ट्रेन को फिर से शुरू कर दिया गया है। यह ट्रेन सेवा पठानकोट-जोगिंद्रनगर के बीच मिलती है। इस रूट को कांगड़ा वैली रेलवे के नाम से जाना जाता है।
साल 2022 के अगस्त में आयी भारी बाढ़ के दौरान चक्की रेलवे पुल के क्षतिग्रस्त हो जाने की वजह से इस रेल सेवा को बंद कर देना पड़ा था।
ब्रिटिश काल में हुई थी शुरू
कांगड़ा वैली टॉय ट्रेन की शुरुआत वर्ष 1929 में यानी अंग्रेजों के जमाने में हुई थी। पंजाब के पठानकोट से हिमाचल प्रदेश के जोगिंद्रनगर के बीच यह करीब 164 किलोमीटर का लंबा सफर तय करती है। रूट में यह ट्रेन हिमाचल के कई प्रमुख मंदिरों जैसे ज्वालामुखी, पालमपुर के चाय बगान और हिमाचल प्रदेश के कई खूबसूरत गांवों को जोड़ती है।
रास्ते में आने वाली सुरंगें, झरने, मैदान और खेत इस रूट का विशेष आकर्षण हैं। बताया जाता है कि पूरे रास्ते के दौरान यह टॉय ट्रेन करीब 900 से अधिक पुलों को पार करता है।
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10 घंटे का समय और 33 स्टॉप
पठानकोट से जोगिंद्रनगर के बीच का पूरा रास्ता तय करने में इस ट्रेन को लगभग 10 घंटे का समय लगता है। पूरे रास्ते में करीब 33 स्टॉप आते हैं जिसमें जसूर, ज्वालामुखी रोड, कांगड़ा, नगरोटा, पालमपुर आदि प्रमुख शामिल है। भारत के अन्य जगहों पर चलने वाली टॉय ट्रेन जैसे दार्जिलिंग, शिमला, माथेरान और नीलगिरी के मुकाबले कांगड़ा की नैरो गेज ट्रेन काफी अलग है। यह ट्रेन सबसे अधिक लंबी दूरी तय करने के साथ ही सबसे कम किराया भी लेती है।
किराया और कैसे खरीदे टिकट?
यात्रियों की सुविधा के लिए कांगड़ा टॉय ट्रेन का किराया बहुत कम रखा गया है। इस ट्रेन का किराया ₹20 से ₹40 के बीच रखा गया है ताकि स्थानीय लोगों को कोई समस्या न हो। हालांकि इस टॉय ट्रेन की सवारी के आपको टिकट ऑनलाइन नहीं मिल सकेगा।
यात्रियों को सीधे रेलवे स्टेशन के ऑफलाइन काउंटर से ही खरीदनी पड़ेगी। अमर उजाला की मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रेल मंत्रालय इस रूट को बड़ी पटरी में बदलने की योजना बनायी जा रही है जिसके लिए सर्वे का काम भी किया जा रहा है। लेकिन वर्तमान में यह अपने पुराने स्वरूप में ही वापस लौट आयी है।