साल 2020 के आंकड़ों पर अगर ध्यान दिया जाए तो उस साल दुनिया भर में करीब 3,08,102 लोग ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित हुए थे। विभिन्न शोधों में यह पाया गया है कि हर साल प्रति एक लाख पुरुषों में औसतन 3.70 लोग और प्रति एक लाख महिलाओं में 2.60 महिलाएं प्राथमिक मैलिग्नेंट ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित होते हैं।
भारत में हर साल जितने लोग कैंसर से पीड़ित होते हैं उनमें से लगभग 2 प्रतिशत (करीब 40,000 लोग) पहले ब्रेन ट्यूमर के मरीज रह चुके होते हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यदि ब्रेन ट्यूमर मैलिग्नेंट (घातक) हो तो मरीज के बचने की संभावना 30 प्रतिशत से भी कम रह जाती है।
इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि ब्रेन ट्यूमर के बारे में जागरूकता फैलाने की कितनी जरूरत है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बीमारी का पता शुरुआती चरण में चल जाए तो इलाज की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है।
ऐसे में सवाल यह है कि किन सामान्य लक्षणों को देखकर तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए?
क्या होता है ब्रेन ट्यूमर?
ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क या मस्तिष्क को घेरने वाली झिल्ली के अंदर असामान्य कोशिकाओं की वृद्धि को कहा जाता है। यह ट्यूमर मस्तिष्क के सामान्य कार्यों को बाधित कर सकता है। सामान्यतः ट्यूमर को दो भागों में बांटा जाता है - बेनाइन (Benign) और मैलिग्नेंट (Malignant)। ट्यूमर का प्रकार इस बात पर निर्भर करता है कि कोशिकाएं कहां से उत्पन्न हुई हैं और वे कैंसर पैदा करने वाली हैं या नहीं।
यदि समय पर उपचार न किया जाए तो किसी भी प्रकार का ब्रेन ट्यूमर धीरे-धीरे मस्तिष्क के स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसकी वजह से गंभीर शारीरिक अक्षमता और यहां तक कि जीवन के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है।
क्या होती है समस्याएं?
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेन ट्यूमर का सबसे पहला और प्रमुख लक्षण सिरदर्द होता है। हालांकि अधिकांश सिरदर्द हानिकारक नहीं होते और आमतौर पर मानसिक तनाव, नींद की कमी, शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) या लंबे समय तक स्क्रीन के उपयोग के कारण होते हैं। हालांकि कुछ मामलों में सिरदर्द का प्रकार या उसकी तीव्रता में बदलाव किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है।
सिरदर्द को लेकर कब हो जाएं सतर्क?
* यदि सिरदर्द धीरे-धीरे बढ़ता जाए। यह पहले की तुलना में अधिक बार होने लगे या लंबे समय तक लगातार बना रहे तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
* यदि सुबह नींद से उठने के बाद तेज सिरदर्द हो। दर्द की वजह से ही नींद खुल जाए, सिरदर्द के साथ मतली या उल्टी महसूस हो तो डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है।
* ऐसा सिरदर्द जो सामान्य दवाओं से ठीक न हो या खांसी, झुककर काम करने या शारीरिक परिश्रम के दौरान और बढ़ जाए तो यह भी चेतावनी का संकेत हो सकता है।
* हालांकि सिर्फ सिरदर्द का मतलब ब्रेन ट्यूमर नहीं होता लेकिन यदि सिरदर्द के सामान्य पैटर्न में बदलाव दिखाई दे तो उसे नजरंदाज नहीं करना चाहिए।
Image - Ei Samay ब्रेन ट्यूमर के किन लक्षणों को न करें नजरंदाज
- ब्रेन ट्यूमर के लक्षण ट्यूमर के स्थान और आकार पर निर्भर करते हैं और अलग-अलग हो सकते हैं। कई बार धुंधला दिखाई देना, डबल विजन, सुनने की क्षमता में बदलाव, संतुलन बनाए रखने में कठिनाई या बार-बार चक्कर आना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं जिन्हें लोग आमतौर पर गंभीरता से नहीं लेते।
- इसके अलावा हाथ या पैर में कमजोरी या सुन्नपन, बोलने में समस्या, याददाश्त में कमी, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, व्यवहार में बदलाव या बिना कारण चिड़चिड़ापन भी महत्वपूर्ण लक्षण हो सकते हैं। अक्सर लोग इन लक्षणों को थकान, तनाव या उम्र से जुड़ी समस्या मानकर नजरंदाज कर देते हैं।
- विशेष रूप से यदि किसी को दौरे या मिर्गी जैसा दौरा पड़े तो अधिक सतर्क रहना चाहिए। जिन लोगों को पहले कभी मिर्गी या दौरे का इतिहास नहीं रहा हो और अचानक दौरा आए तो उन्हें तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।
डॉक्टर से जरूर करें संपर्क
यदि कोई लक्षण लंबे समय तक बना रहे, धीरे-धीरे बढ़ता जाए या एक से अधिक लक्षण एक साथ दिखाई दें तो निश्चित रूप से डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। यह याद रखना जरूरी है कि इन लक्षणों का मतलब हमेशा ब्रेन ट्यूमर नहीं होता।
अधिकांश मामलों में ये अपेक्षाकृत कम गंभीर बीमारियों के कारण भी हो सकते हैं लेकिन डॉक्टर से जांच करवाकर इसकी पुष्टि करना बेहतर होता है वर्ना बड़ी समस्या हो सकती है।
शरीर में होने वाले असामान्य बदलावों के प्रति जागरूक रहना बेहद जरूरी है। समय पर जांच और सही उपचार कई गंभीर बीमारियों को शुरुआती चरण में पहचानने में मदद करता है जिससे इलाज की सफलता की संभावना भी काफी बढ़ जाती है। इसलिए बिना जरूरत घबराने के बजाय किसी भी असामान्य या नए लक्षण के दिखने पर जल्द से जल्द विशेषज्ञ की सलाह लेना ही समझदारी है।