कोलकाताः पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में झटका लगने के बाद तृणमूल कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के बागी गुट की अगुवाई कर रहीं बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कल्याण बनर्जी ने कई मौकों पर उनके और अन्य महिला सांसदों के प्रति आपत्तिजनक, अपमानजनक और महिलाओं को नीचा दिखाने वाली टिप्पणियां कीं।
काकोली घोष दस्तिदार ने लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए, जिसमें तत्काल निष्कासन तक पर विचार किया जा सकता है।
महिला सांसदों के सम्मान का मुद्दा उठाया
स्पीकर को लिखे गए पत्र में काकोली घोष दस्तिदार ने कहा कि कल्याण बनर्जी का व्यवहार किसी एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लगातार दोहराया जाने वाला आचरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रीरामपुर सांसद कई बार व्यक्तिगत हमलों, डराने-धमकाने और महिला विरोधी टिप्पणियों का सहारा लेते रहे हैं।
उनका कहना है कि इस तरह का व्यवहार न केवल संसदीय मर्यादा के खिलाफ है, बल्कि इससे महिला सांसदों की स्वतंत्र और निर्भीक भागीदारी भी प्रभावित होती है।
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काकोली ने अपने पत्र में संविधान के अनुच्छेद 105 का उल्लेख करते हुए कहा कि सांसदों को मिली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उद्देश्य संसदीय कार्यवाही में निर्भीक भागीदारी सुनिश्चित करना है। इसे किसी सहकर्मी सांसद के प्रति व्यक्तिगत अपमान, उत्पीड़न या धमकी का अधिकार नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों पर संसद के नियमों और स्थापित परंपराओं के अनुसार विचार होना चाहिए।
स्पीकर से निष्कासन तक की मांग
बागी सांसद काकोली घोष ने लोकसभा अध्यक्ष से कल्याण बनर्जी के कथित दुर्व्यवहार को संज्ञान में लेने और उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने अपने पत्र में तत्काल निष्कासन सहित उचित दंड पर विचार करने का अनुरोध किया।
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बागी गुट की गतिविधियों के बीच बढ़ा विवाद
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर मतभेद लगातार गहराते जा रहे हैं। हाल ही में काकोली घोष दस्तिदार के नेतृत्व में 20 सांसदों के एक समूह ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की थी।
इसी समूह ने बाद में नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय का भी ऐलान किया, जिससे तृणमूल कांग्रेस की मुश्किलें और बढ़ गईं।
कल्याण बनर्जी ने आरोपों को बताया मनगढ़ंत
दूसरी ओर, कल्याण बनर्जी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि आरोप पूरी तरह झूठे, गढ़े हुए और बाद में तैयार की गई कहानी का हिस्सा हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ऐसा कोई व्यवहार हुआ था तो शिकायत पहले क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा कि काकोली घोष दस्तिदार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कथित घटनाएं किस लोकसभा कार्यकाल के दौरान हुईं।
कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि 6 मई को काकोली घोष दस्तिदार को लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से हटाए जाने के बाद से उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से दूरी बनानी शुरू कर दी थी। बाद में उनकी जगह कल्याण बनर्जी को यह जिम्मेदारी दी गई। उनका आरोप है कि बागी गुट को संगठित करने और उनके खिलाफ अभियान चलाने के पीछे राजनीतिक कारण हैं।
चुनावी हार के बाद बढ़ी खींचतान
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और गुटबाजी खुलकर सामने आ रही है। एक ओर ममता बनर्जी के प्रति वफादार नेता हैं, तो दूसरी ओर असंतुष्ट सांसदों का समूह अपनी अलग राजनीतिक राह तलाशता दिख रहा है।
ऐसे माहौल में काकोली घोष दस्तिदार और कल्याण बनर्जी के बीच टकराव को केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही बड़ी राजनीतिक लड़ाई के रूप में भी देखा जा रहा है।
स्पीकर के फैसले पर टिकी निगाहें
फिलहाल लोकसभा अध्यक्ष की ओर से इस मामले पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। कल्याण बनर्जी ने भी कहा है कि जब तक स्पीकर उनसे जवाब नहीं मांगते, तब तक वे कोई औपचारिक प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं समझते।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि लोकसभा अध्यक्ष इस शिकायत पर क्या रुख अपनाते हैं और तृणमूल कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई आगे किस दिशा में जाती है।