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काकोली घोष के बेटे का बड़ा कदम, ममता बनर्जी समेत टीएमसी दिग्गजों को 15 दिन का अल्टीमेटम

काकोली घोष के बेटे ने कल्याण बनर्जी, सौगत रॉय, महुआ मोइत्रा और सोनाली गुहा को भी नोटिस भेजा, सभी आरोपों को बताया भ्रामक।

By श्वेता सिंह

Jun 14, 2026 00:52 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक नया विवाद सामने आया है, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को कानूनी नोटिस भेजा गया है। यह नोटिस टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तिदार के बेटे डॉक्टर वैद्यनाथ घोष दस्तिदार की ओर से भेजा गया है, जिसके बाद राज्य की सियासत में हलचल और बढ़ गई है। इस नोटिस में केवल ममता बनर्जी ही नहीं, बल्कि टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी, सौगत रॉय, महुआ मोइत्रा और पूर्व नेता सोनाली गुहा को भी शामिल किया गया है। आरोप लगाया गया है कि इन नेताओं की ओर से उनके बारे में गलत और भ्रामक जानकारी सार्वजनिक रूप से फैलाई गई, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है।

विवाद की जड़ में यह दावा है कि कुछ राजनीतिक और मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि डॉक्टर वैद्यनाथ घोष दस्तिदार ने बारासात विधानसभा क्षेत्र से टिकट की मांग की थी और टिकट न मिलने के बाद उनकी मां काकोली घोष दस्तिदार ने राजनीतिक रुख बदल लिया। नोटिस में इन सभी दावों को पूरी तरह गलत, निराधार और भ्रामक बताया गया है। उनका कहना है कि उन्होंने कभी किसी विधानसभा सीट से टिकट की मांग नहीं की और न ही उनकी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि उन्हें केवल आईपैक की ओर से राजनीति में आने पर विचार करने का सुझाव दिया गया था, लेकिन उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम नहीं रखा।

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यह पूरा मामला उस राजनीतिक पृष्ठभूमि में और चर्चा में आया है, जब हाल ही में टीएमसी के कुछ सांसदों के एक समूह ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर एनडीए के साथ जुड़ने की इच्छा जताई थी, जिसमें काकोली घोष दस्तिदार का नाम भी सामने आया था। इसी घटनाक्रम के बाद पार्टी के भीतर और बाहर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।

नोटिस में सभी संबंधित नेताओं से 15 दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि तय समयसीमा में माफी नहीं मांगी गई तो आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा भविष्य में इस तरह के कथित भ्रामक और अपमानजनक बयानों से बचने की भी अपील की गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने टीएमसी के भीतर पहले से चल रही राजनीतिक खींचतान को और अधिक चर्चा में ला दिया है और इसे पार्टी के लिए एक नई चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

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