नई दिल्लीः भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की भुगतान व्यवस्था को अगले चरण में ले जाने के लिए ‘पेमेंट्स विजन 2028’ का खाका तैयार किया है। इस पहल का उद्देश्य केवल डिजिटल लेनदेन की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि पूरी प्रणाली को अधिक कुशल, सुरक्षित और अंतरराष्ट्रीय जरूरतों के अनुरूप बनाना है। ईवाई की रिपोर्ट के अनुसार, इस विजन में सीमा-पार लेनदेन को विशेष प्राथमिकता दी गई है, जिससे छोटे कारोबारियों, एमएसएमई, निर्यातकों और आम उपभोक्ताओं को सीधे लाभ मिलने की संभावना है।
सीमा-पार लेनदेन में कम होंगी बाधाएं
विदेशों में धन भेजने और प्राप्त करने की मौजूदा व्यवस्था कई स्तर की मंजूरियों, अधिक लागत और लंबी प्रक्रियाओं से जुड़ी हुई है। आरबीआई (RBI) अब इस ढांचे की व्यापक समीक्षा कर रहा है ताकि कारोबारी गतिविधियों में आने वाली रुकावटों को कम किया जा सके।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स (PSS) अधिनियम और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) से संबंधित अनुमतियों को एकीकृत करने पर विचार किया जा रहा है। ‘सिंगल विंडो’ मॉडल लागू होने पर व्यवसायों को अलग-अलग प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी।
आरबीआई अंतरराष्ट्रीय लेनदेन की लागत, गति और दक्षता से जुड़ी नियमित रिपोर्ट भी जारी करेगा। यह पहल जी-20 के उस लक्ष्य के अनुरूप है, जिसके तहत वर्ष 2027 तक सीमा-पार लेनदेन को अधिक तेज, सस्ता और पारदर्शी बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
यूपीआई ने दिखाई भारत की डिजिटल ताकत
भारत आज दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम डिजिटल लेनदेन बाजारों में शामिल है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वित्त वर्ष 2025-26 में यूपीआई (UPI) के जरिए 24,162 करोड़ से अधिक लेनदेन दर्ज किए गए, जिनका कुल मूल्य लगभग 314 लाख करोड़ रुपये रहा। जून 2025 में अकेले 18.4 अरब से अधिक ट्रांजेक्शन हुए।
सीमा-पार यूपीआई लेनदेन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2024 में जहां इनकी संख्या करीब 37 हजार थी, वहीं वित्त वर्ष 2025 में यह बढ़कर 7.55 लाख तक पहुंच गई। वित्त वर्ष 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही 6 लाख से अधिक अंतरराष्ट्रीय यूपीआई ट्रांजेक्शन दर्ज किए जा चुके हैं।
यूपीआई (UPI) अब संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, फ्रांस, श्रीलंका, नेपाल, भूटान और मॉरीशस सहित सात देशों में उपलब्ध है। इससे विदेशों में रहने वाले भारतीयों और यात्रियों के लिए लेनदेन पहले की तुलना में अधिक सहज हुआ है।
एआई, सुरक्षा और उपभोक्ता सुविधा पर विशेष जोर
पेमेंट्स विजन 2028 में तकनीकी नवाचार को भी अहम स्थान दिया गया है। आरबीआई कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डेटा एनालिटिक्स के जरिए धोखाधड़ी की पहचान, जोखिम प्रबंधन और निगरानी प्रणाली को मजबूत बनाना चाहता है।
नई पहल के तहत उपयोगकर्ता अपने मोबाइल या ऐप के माध्यम से विभिन्न डिजिटल लेनदेन सुविधाओं को जरूरत के अनुसार चालू या बंद कर सकेंगे। अनधिकृत लेनदेन की स्थिति में बैंक और ग्राहक की जिम्मेदारी तय करने के लिए साझा जवाबदेही ढांचा विकसित किया जाएगा।
इसके अलावा टीआरईडीएस प्लेटफॉर्म की इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने, पेमेंट्स स्विचिंग सर्विस के जरिए बैंक खाता बदलने की प्रक्रिया को सरल बनाने तथा एआई आधारित भुगतान डाटाबेस और साइबर जोखिम संकेतक विकसित करने की भी योजना है।
लक्ष्य केवल संख्या नहीं, वैश्विक नेतृत्व
आरबीआई (RBI) का उद्देश्य सिर्फ अधिक ट्रांजेक्शन दर्ज करना नहीं है। केंद्रीय बैंक चाहता है कि भारत भुगतान प्रणाली के डिजाइन, मानकों और नवाचार के क्षेत्र में भी वैश्विक नेतृत्व स्थापित करे।
पेमेंट्स विजन 2028 में कुल 15 प्रमुख पहलें शामिल हैं, जिनका फोकस उपयोगकर्ता सुविधा, कारोबारी सुगमता, धोखाधड़ी रोकथाम और सीमा-पार लेनदेन सुधार पर है। ईवाई का मानना है कि यह रोडमैप भारत की डिजिटल और वित्तीय अवसंरचना को नई मजबूती देगा तथा छोटे व्यापारियों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
दिसंबर 2028 तक लागू रहने वाले इस विजन से उम्मीद है कि भारत की भुगतान प्रणाली अधिक समावेशी, सुरक्षित और विश्वस्तरीय बनेगी, जिससे देश डिजिटल अर्थव्यवस्था के वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा।