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बंगाल की राजनीति में नई हलचल, टीएमसी से अलग हुए मानस भुइयां

साबंग से चुनाव हारने के बाद पार्टी से बढ़ी दूरी। टीएमसी में लगातार बढ़ रही बगावत के बीच इस्तीफे को माना जा रहा बड़ा झटका।

By श्वेता सिंह

Jun 13, 2026 22:53 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को शनिवार को एक और बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री डॉ. मानस रंजन भुइयां ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को पत्र भेजकर अपना निर्णय बताया। उनके इस्तीफे ने टीएमसी के भीतर बढ़ते असंतोष और चुनावी हार के बाद उभर रहे राजनीतिक संकट को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, डॉ. भुइयां ने व्यक्तिगत कारणों और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए यह फैसला लिया है। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपने अगले राजनीतिक कदम का खुलासा नहीं किया है, लेकिन उनके इस्तीफे को टीएमसी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक नुकसान माना जा रहा है।

कांग्रेस से टीएमसी तक का लंबा राजनीतिक सफर

डॉ. मानस रंजन भुइयां पश्चिम मेदिनीपुर जिले की साबंग सीट से छह बार विधायक रह चुके हैं। लंबे समय तक कांग्रेस की राजनीति से जुड़े रहने के बाद उन्होंने वर्ष 2016 में तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था। पार्टी में शामिल होने के बाद उन्हें राज्य सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं और वे सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री भी रहे।

साबंग और आसपास के इलाकों में उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ मानी जाती रही है। स्थानीय राजनीति में उनका प्रभाव लंबे समय तक कायम रहा और वे क्षेत्र के प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे।

चुनावी हार के बाद बढ़ी नाराजगी

वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में डॉ. भुइयां ने टीएमसी के टिकट पर साबंग से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार अमल पांडा के हाथों हार का सामना करना पड़ा। चुनाव परिणाम आने के बाद उन्होंने हार की जिम्मेदारी स्वयं लेते हुए कहा था कि एक कप्तान होने के नाते पराजय की जवाबदेही उनकी है।

उन्होंने उस समय पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की भी प्रशंसा की थी। डॉ. भुइयां ने कहा था कि मेदिनीपुर का एक बेटा राज्य का मुख्यमंत्री बना है, जिस पर उन्हें गर्व है। साथ ही उन्होंने साबंग क्षेत्र में उत्पन्न तनावपूर्ण परिस्थितियों की ओर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। इन बयानों के बाद से ही उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ने की चर्चाएं तेज हो गई थीं।

चुनावी झटके के बाद टीएमसी में बढ़ी बेचैनी

2026 के विधानसभा चुनाव टीएमसी के लिए बेहद निराशाजनक साबित हुए। पार्टी, जो पहले 215 सीटों पर काबिज थी, घटकर केवल 80 सीटों तक सिमट गई। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर सरकार बनाई और शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बने। चुनाव में ममता बनर्जी को भी अपनी सीट गंवानी पड़ी।

चुनावी पराजय के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा। लोकसभा में पार्टी के 28 सांसदों में से 19 सांसदों के विद्रोह कर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का समर्थन करने की खबरें सामने आईं। इसके अलावा राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने भी पार्टी छोड़ दी। ऐसे माहौल में मानस भुइयां का इस्तीफा टीएमसी के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

पार्टी में टूट की चर्चाएं तेज

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि टीएमसी के भीतर असंतोष का दायरा लगातार बढ़ रहा है। बताया जा रहा है कि 58 विधायकों ने अलग राजनीतिक समूह बनाने के लिए हस्ताक्षर भी किए हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने इन घटनाक्रमों को ज्यादा महत्व नहीं दिया है।

ममता बनर्जी ने हाल ही में कहा था कि जो नेता पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन तृणमूल कांग्रेस को फिर से मजबूत किया जाएगा और संगठन को नए सिरे से खड़ा किया जाएगा।

आगे क्या करेंगे मानस भुइयां?

डॉ. मानस रंजन भुइयां के अगले राजनीतिक कदम को लेकर अटकलें तेज हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वे भारतीय जनता पार्टी या किसी अन्य राजनीतिक मंच के साथ नई पारी शुरू कर सकते हैं। हालांकि अभी तक उन्होंने इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

टीएमसी सूत्रों ने उनके इस्तीफे को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है, जबकि साबंग से भाजपा विधायक अमल पांडा ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में पार्टी छोड़ना उचित फैसला नहीं माना जा सकता।

विशेषज्ञों का मानना है कि मानस भुइयां के जाने का असर सबसे अधिक पश्चिम मेदिनीपुर और साबंग क्षेत्र की राजनीति पर पड़ सकता है। वहीं 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले टीएमसी के सामने संगठन को एकजुट रखने और कार्यकर्ताओं का भरोसा बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। बंगाल की बदलती राजनीतिक तस्वीर में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में और महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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