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‘गन फायरिंग’ सेलिब्रेशन पर मचा बवाल, ईरानी मिडफील्डर के जश्न ने सोशल मीडिया पर छेड़ी नई बहस

न्यूजीलैंड के खिलाफ ईरान के 2-2 से ड्रॉ मैच।

लॉस एंजिलिस : फुटबॉल में गोल करने के बाद खिलाड़ियों द्वारा अलग-अलग अंदाज में जश्न मनाना कोई नई बात नहीं है। लेकिन कई बार यही जश्न मुकाबले से भी अधिक चर्चा का विषय बन जाता है। 2026 फीफा विश्व कप में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ ईरान के 2-2 से ड्रॉ मैच के बाद कुछ ऐसा ही देखने को मिला। मुकाबले के बाद ईरानी मिडफील्डर मोहम्मद मोहिबी अपने खेल से ज्यादा गोल के बाद किए गए जश्न को लेकर सुर्खियों में हैं। गोल करने के बाद उनके ‘गन फायरिंग’ यानी बंदूक चलाने की मुद्रा में किए गए सेलिब्रेशन ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है।

लॉस एंजिलिस के सोफी स्टेडियम में खेले गए ग्रुप ‘जी’ के इस मुकाबले में ईरान ने दो बार पिछड़ने के बावजूद शानदार वापसी की। न्यूज़ीलैंड की ओर से इलायजा जस्ट ने दोनों गोल किए, जबकि ईरान के लिए रामिन रेजाइयान और मोहम्मद मोहिबी ने गोल दागे।

हालांकि मैच का परिणाम अब चर्चा का मुख्य विषय नहीं रहा। सबसे ज्यादा ध्यान मोहिबी के जश्न ने खींचा है। मैच के 64वें मिनट में रामिन रेजाइयान के सटीक क्रॉस पर मोहिबी ने शानदार हेडर लगाकर गेंद को जाल में पहुंचा दिया। गोल करने के बाद भावनाओं में बहते हुए उन्होंने हाथों से बंदूक चलाने जैसी मुद्रा बनाई। कुछ ही पलों में यह दृश्य सोशल मीडिया पर फैल गया और तेजी से वायरल होने लगा। इसके बाद इस पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

कई समर्थकों ने इस जश्न को राजनीतिक संकेतों से जोड़कर देखा। उनका दावा है कि अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के विरोध के रूप में यह सेलिब्रेशन किया गया। कुछ लोगों ने तो फीफा से मोहिबी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग भी कर डाली। सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर उन्हें विश्व कप के शेष मुकाबलों से प्रतिबंधित करने की मांग तक उठाई गई।

मोहिबी के जश्न को लेकर पैदा हुआ विवाद इसलिए भी अधिक चर्चा में है क्योंकि ईरान की टीम पहले से ही कई राजनीतिक कारणों से सुर्खियों में रही है। विश्व कप में भाग लेने के लिए अमेरिका पहुंचने के दौरान वीजा संबंधी जटिलताओं, बेस कैंप में बदलाव और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक परिस्थितियों के कारण ईरानी टीम लगातार चर्चा के केंद्र में बनी हुई थी।

मुकाबले वाले दिन भी सोफी स्टेडियम के बाहर सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने ईरान सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। फीफा की ओर से कुछ प्रतीकों के प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद अनेक समर्थक बैनर, झंडों और टी-शर्टों के माध्यम से अपने संदेश प्रदर्शित करते नजर आए। सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी थी। दर्शकों को मेटल डिटेक्टर जांच और बैग की तलाशी के बाद ही स्टेडियम में प्रवेश की अनुमति दी गई।

अगर मैदान की बात करें तो मुकाबला भी काफी रोमांचक रहा। सातवें मिनट में इलायजा जस्ट के गोल से न्यूजीलैंड ने बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद 32वें मिनट में रामिन रेजाइयान ने गोल करके ईरान को बराबरी दिलाई।

दूसरे हाफ की शुरुआत में एक बार फिर इलायजा जस्ट ने गोल दागकर न्यूजीलैंड को आगे कर दिया। ऐसा लग रहा था कि मुकाबला न्यूजीलैंड के पक्ष में जा सकता है, लेकिन ईरान ने हार नहीं मानी।

64वें मिनट में रामिन रेजाइयान के शानदार क्रॉस पर मोहम्मद मोहिबी ने बेहतरीन हेडर लगाया और गेंद को गोलपोस्ट के अंदर पहुंचाकर स्कोर 2-2 कर दिया। यही गोल अंततः ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण अंक सुनिश्चित करने वाला साबित हुआ।

इस ड्रॉ के बाद ग्रुप ‘जी’ में बेहतर गोल अंतर के आधार पर न्यूजीलैंड शीर्ष स्थान पर है, जबकि ईरान दूसरे स्थान पर मौजूद है। इसी समूह के दूसरे मुकाबले में बेल्जियम और मिस्र ने 1-1 से ड्रॉ खेला। परिणामस्वरूप पहले दौर के मुकाबलों के बाद चारों टीमों के खाते में एक-एक अंक दर्ज है।

फिर भी मैच समाप्त होने के बाद चर्चा का केंद्र किसी टीम की रणनीति, किसी गोल की गुणवत्ता या मैच के नतीजे से ज्यादा मोहम्मद मोहिबी का ‘गन फायरिंग’ सेलिब्रेशन बना हुआ है, जिसने खेल जगत और सोशल मीडिया दोनों जगह बहस को जन्म दे दिया है।

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