नई दिल्ली/कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुट द्वारा पार्टी के विलय संबंधी अनुरोध पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला करेंगे। सूत्रों के अनुसार अध्यक्ष इस मामले में सभी पक्षों को सुनकर आगे की कार्रवाई तय करेंगे।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय और तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व के बीच पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को भेजे गए नोटिस के समय को लेकर विवाद गहरा गया है।
TMC सूत्रों के मुताबिक लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय ने 15 जून को दोपहर 2 बजे अभिषेक बनर्जी को ईमेल भेजा था। उस समय बनर्जी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समक्ष पूछताछ में शामिल थे। पूछताछ प्रक्रिया के दौरान उनके पास मोबाइल फोन और निजी ईमेल तक पहुंच नहीं थी।
सूत्रों का दावा है कि ईमेल में अभिषेक बनर्जी को उसी दिन शाम 4 बजे तक दिल्ली पहुंचकर लोकसभा अध्यक्ष से मिलने के लिए कहा गया था यानी उन्हें लगभग दो घंटे का समय दिया गया।
समाचार एजेंसी एएनआई को मिली जानकारी के अनुसार ईमेल भेजे जाने के करीब एक घंटे बाद लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय की ओर से तृणमूल सांसद कीर्ति आजाद को फोन कर निर्धारित मुलाकात की सूचना भी दी गई।
इसके बाद कीर्ति आजाद स्वयं लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों को अभिषेक बनर्जी की अनुपलब्धता के बारे में अवगत कराया। उन्होंने बताया कि अभिषेक बनर्जी एक चल रही जांच के तहत सरकारी एजेंसी के साथ सहयोग कर रहे हैं और उस समय ईडी की पूछताछ में व्यस्त थे।
कीर्ति आजाद ने स्पष्ट किया कि इन परिस्थितियों में अभिषेक बनर्जी के लिए शाम 4 बजे की बैठक में शामिल होना संभव नहीं है। उन्होंने पार्टी की ओर से मुलाकात के लिए नई तारीख और समय तय करने का अनुरोध किया तथा कहा कि बनर्जी लोकसभा अध्यक्ष की प्रक्रिया में पूरा सहयोग देने को तैयार हैं।
इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के भीतर बागी गुट के विलय प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक और कानूनी संघर्ष और तेज हो गया है। बागी सांसद अपने कदम को मान्यता दिलाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि पार्टी नेतृत्व इस प्रस्ताव की वैधता को चुनौती देने और अपने संगठनात्मक ढांचे को बचाए रखने में जुटा है।