कोलकाता : सरकारी सहयोग के अभाव में पिछले एक दशक के दौरान पश्चिम बंगाल में एथलेटिक्स की कोई राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता आयोजित नहीं हो सकी थी। लेकिन भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने के महज पांच सप्ताह के भीतर सोमवार को कोलकाता में एक दिवसीय इंडियन एथलेटिक्स सीरीज का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में देशभर से लगभग 300 एथलीटों ने भाग लिया और सॉल्टलेक स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) केंद्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
हालांकि इस प्रतियोगिता में अनिमेष कुजूर, आभा खाटुआ और हिमा दास जैसे चर्चित एथलीट हिस्सा लेने नहीं पहुंचे, लेकिन एशियाई चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता हरमिलन बैंस और अमिय कुमार मलिक जैसे कई प्रमुख खिलाड़ी प्रतियोगिता में शामिल हुए।
पश्चिम बंगाल एथलेटिक्स संघ के सचिव कमल मैत्र ने कहा “ऑल इंडिया एथलेटिक्स फेडरेशन ने हमें इस प्रतियोगिता के आयोजन की जिम्मेदारी दी थी। हालांकि अंतिम समय तक यह आशंका बनी हुई थी कि हम इसका सफल आयोजन कर पाएंगे या नहीं। लेकिन खेल मंत्री इंद्रनील खां ने अंतिम समय में युवा आवास में खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था कर दी, जिसके कारण हम इस प्रतियोगिता का आयोजन कर सके।”
एथलीटों का उत्साह बढ़ाने के लिए पश्चिम बंगाल की सबसे सफल एथलीटों में से एक ज्योतिर्मयी शिकदार भी कार्यक्रम में मौजूद थीं। वर्ष 1998 बैंकॉक एशियाई खेलों में दो स्वर्ण पदक जीतने वाली ज्योतिर्मयी लंबे समय से सक्रिय राजनीति से भी जुड़ी रही हैं।
ज्योतिर्मयी शिकदार का आरोप है कि विपक्षी राजनीति से जुड़ाव के कारण तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान उन्हें लंबे समय तक उपेक्षित रखा गया। उन्हें राज्य एथलेटिक्स संघ के कार्यकारी अध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया था। इसके अलावा ऑल इंडिया एथलेटिक्स फेडरेशन में संयुक्त सचिव का पद मिलने के बावजूद राज्य स्तर पर उनकी सेवाओं का उपयोग नहीं किया गया।
सोमवार को ज्योतिर्मयी शिकदार ने कहा “पिछले 15 वर्षों में पश्चिम बंगाल के लगभग सभी प्रमुख खिलाड़ियों को एक या एक से अधिक बार बंगविभूषण, बंगभूषण और बंगरत्न जैसे सम्मान मिले हैं, लेकिन मुझे तृणमूल सरकार ने कभी इनमें से कोई पुरस्कार नहीं दिया। इस बात ने मुझे काफी दुख पहुंचाया। यहां तक कि मुझे किसी सरकारी कार्यक्रम में भी आमंत्रित नहीं किया जाता था। इसी कारण मैंने नाराजगी और दुख के चलते मैदान पर आना भी बंद कर दिया था।”
उन्होंने आगे कहा कि अब वह पुरानी पीड़ा को पीछे छोड़कर नई सरकार के खेल विकास कार्यक्रमों का हिस्सा बनने के लिए फिर से मैदान में लौट आई हैं।
देशभर के एथलीटों की राष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार लाने के उद्देश्य से पिछले वर्ष से इंडियन एथलेटिक्स सीरीज की शुरुआत की गई है। पूरे वर्ष के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में कुल 14 प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है।
इस श्रृंखला की विशेषता यह है कि इसमें उच्च गुणवत्ता वाले ट्रैक, इलेक्ट्रॉनिक स्कोरिंग प्रणाली और प्रतियोगिता के लाइव स्ट्रीमिंग प्रसारण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही खिलाड़ियों के लिए डोप परीक्षण की व्यवस्था भी की गई है।
इस सीरीज में भाग लेने वाले प्रत्येक एथलीट के लिए कम से कम तीन प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना अनिवार्य किया गया है, ताकि राष्ट्रीय रैंकिंग प्रणाली को अधिक प्रभावी और प्रतिस्पर्धात्मक बनाया जा सके।
इसी बीच प्रतियोगिता के दौरान एक दिलचस्प घटना भी सामने आई। बताया गया कि डोप परीक्षण के डर से रेलवे की 800 मीटर धाविका रूबी गुड़िया साई केंद्र छोड़कर चली गईं।
प्रतियोगिता में पश्चिम बंगाल के खिलाड़ियों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया और कई स्पर्धाओं में उल्लेखनीय परिणाम हासिल किए। इस आयोजन को राज्य में एथलेटिक्स के पुनर्जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।