नई दिल्ली : कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि वह फ्रांस में होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मुलाकात में ओमान तट के निकट अमेरिकी हमलों में मारे गए तीन भारतीय नाविकों का मुद्दा उठाएं।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात बुधवार को जी-7 सम्मेलन के इतर प्रस्तावित है। फरवरी 2025 में वाशिंगटन में हुई पिछली बैठक के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली आमने-सामने की बातचीत होगी। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान भारतीय नाविकों की मौत को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। पत्रकारों से बातचीत में प्रियंका ने कहा कि प्रधानमंत्री को इस मुद्दे को अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने अवश्य उठाना चाहिए। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम पर अपेक्षित स्तर की मुखर प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली है।
भारत-अमेरिका संबंधों की पृष्ठभूमि में अहम मुलाकात
मोदी और ट्रंप की यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब ऑपरेशन सिंदूर और भारत पर लगाए गए टैरिफ को लेकर दोनों देशों के संबंधों में कुछ तनाव देखने को मिला है। हालांकि दोनों नेताओं के बीच हाल के महीनों में फोन पर बातचीत हुई है और अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा पर भी सहमति बनी है, जिस पर बातचीत जारी है।
अमेरिकी चेतावनी और भारत की आपत्ति
प्रियंका की टिप्पणी उस समय आई है जब अमेरिका ने भारत को स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में उसकी नाकेबंदी का उल्लंघन और ईरानी तेल के अवैध परिवहन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने यह संदेश विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत में दिया। जयशंकर ने पिछले सप्ताह अमेरिकी हमलों में भारतीय नागरिकों की मौत पर कड़ा विरोध दर्ज कराया था।
विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट के मुताबिक रुबियो ने कहा कि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए सभी वाणिज्यिक जहाजों को अमेरिकी बलों के निर्देशों का तुरंत पालन करना चाहिए। उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिकी नाकेबंदी का उल्लंघन या ईरानी तेल का अवैध परिवहन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ओमान तट पर हमले में गई थी भारतीय नाविकों की जान
पिछले सप्ताह ओमान तट के पास भारतीय चालक दल वाले तीन जहाज हमलों की चपेट में आए थे। इनमें से एक हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। इसके बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत कर इस घटना पर भारत की कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। भारत सरकार ने नई दिल्ली में अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत जेसन मीक्स को भी तलब किया और स्पष्ट किया कि भारतीय नागरिकों वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हुए घातक हमले अस्वीकार्य हैं।