कोलकाताः पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद इन दिनों फिर से राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। भवानीपुर विधानसभा सीट के चुनाव परिणाम को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती देने के ममता बनर्जी के फैसले पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। राज्य सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने इसे चुनावी हार के बाद की बेचैनी करार देते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख अब भी नतीजों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं दिखतीं।
मीडिया से बातचीत के दौरान घोष ने कहा कि जब भी ममता बनर्जी राजनीतिक दबाव या संकट का सामना करती हैं, तब वह अदालत का रुख करती हैं। उन्होंने दावा किया कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे वह अब भी खुद को चुनावी मुकाबले में मान रही हैं, जबकि जनता अपना फैसला सुना चुकी है।
'15 हजार वोटों की हार के बाद भी पुनर्मतगणना की मांग'
दिलीप घोष ने कहा कि जिन नेताओं को 15 हजार से अधिक मतों के अंतर से हार मिली है, वे अब अदालत में पुनर्मतगणना और पुनर्मतदान की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह लोकतांत्रिक जनादेश को स्वीकार न करने का संकेत है।
भाजपा नेता ने कहा कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया पूरी होने और स्पष्ट परिणाम आने के बाद भी परिणामों को चुनौती देना राजनीतिक हताशा को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी सुप्रीमो हार को पचा नहीं पा रही हैं।
भवानीपुर में शुभेंदु अधिकारी ने दर्ज की बड़ी जीत
2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर, दोनों सीटों से चुनाव लड़ा था। भवानीपुर सीट लंबे समय तक ममता बनर्जी का राजनीतिक गढ़ मानी जाती रही, लेकिन इस बार वहां भाजपा ने बड़ी सेंध लगाई।
चुनाव परिणामों के अनुसार, शुभेंदु अधिकारी को भवानीपुर सीट पर 73,917 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी को 58,812 मत प्राप्त हुए। इस तरह भाजपा नेता ने 15 हजार से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। बाद में उन्होंने नंदीग्राम के बजाय भवानीपुर सीट को बरकरार रखने का फैसला किया।
ममता बनर्जी ने इसी चुनाव परिणाम को अदालत में चुनौती देते हुए पुनर्मतगणना और अन्य कानूनी राहत की मांग की है।
टीएमसी के भीतर भी बढ़ रहा असंतोष
दिलीप घोष ने केवल चुनावी विवाद तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के अंदर चल रहे मतभेदों का भी जिक्र किया और दावा किया कि पार्टी के कई नेता कल्याण बनर्जी के व्यवहार से असंतुष्ट हैं।
उन्होंने कहा कि कल्याण बनर्जी के खिलाफ उनकी ही पार्टी के विधायक और सांसद लगातार शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उनके मुताबिक, अब इस मामले में निर्णायक कदम उठाने का समय आ गया है।
काकोली घोष दस्तिदार ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र
टीएमसी की बागी सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने हाल ही में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजकर सांसद कल्याण बनर्जी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कल्याण बनर्जी ने कई मौकों पर उनके साथ और अन्य महिला सांसदों के प्रति आपत्तिजनक, अपमानजनक और अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया।
अपने पत्र में उन्होंने कहा कि इस तरह का व्यवहार संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक विमर्श की मर्यादा के खिलाफ है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने का अनुरोध किया।
कल्याण बनर्जी ने आरोपों को बताया राजनीतिक साजिश
दूसरी ओर, कल्याण बनर्जी ने सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने काकोली घोष दस्तिदार की शिकायत को झूठा, निराधार और राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया।
कल्याण बनर्जी ने कहा कि वह करीब 40 वर्षों से कानूनी पेशे और सार्वजनिक जीवन से जुड़े हैं तथा उन्होंने कभी ऐसा आचरण नहीं किया, जैसा उन पर आरोप लगाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वह वास्तव में महिलाओं के प्रति अपमानजनक व्यवहार करते हैं, तो शिकायतकर्ता कोई ठोस उदाहरण क्यों नहीं दे रही हैं।
उनका कहना है कि यह पूरा मामला व्यक्तिगत पूर्वाग्रह और राजनीतिक मतभेदों का परिणाम है।
टीएमसी के सामने दोहरी चुनौती
एक ओर ममता बनर्जी चुनावी हार के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं, तो दूसरी ओर पार्टी के भीतर नेताओं के बीच बढ़ते विवाद संगठन के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। भवानीपुर चुनाव परिणाम पर अदालत की सुनवाई और कल्याण बनर्जी को लेकर उठे विवाद ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे दी है।
आने वाले दिनों में अदालत का रुख और पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है या फिर टीएमसी के भीतर बड़े राजनीतिक बदलावों का कारण बनता है।