एवियानः लंबे 16 महीने के अंतराल के बाद मंगलवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर आमने-सामने आए। यह मुलाकात फ्रांस के एवियान में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई, जहां दोनों नेताओं के बीच पहले जैसी गर्मजोशी नजर नहीं आई।
दोनों नेताओं ने एक-दूसरे से संक्षिप्त बातचीत की और हाथ मिलाया, लेकिन इस बार पारंपरिक रूप से दिखने वाला आलिंगन या सार्वजनिक सौहार्द का प्रदर्शन अनुपस्थित रहा। यही बदलाव अब वैश्विक राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
पहले जैसा अपनापन क्यों नहीं दिखा?
पिछले वर्षों में मोदी और ट्रंप की मुलाकातें अक्सर व्यक्तिगत संबंधों और गर्मजोशी के लिए सुर्खियों में रहती थीं। लेकिन इस बार का दृश्य अधिक औपचारिक और नियंत्रित नजर आया, जिसने कूटनीतिक संकेतों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल शिष्टाचार का नहीं, बल्कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों का भी प्रतिबिंब हो सकता है।
ओमान खाड़ी हादसा और तनाव की पृष्ठभूमि
हाल के दिनों में ओमान खाड़ी में एक व्यापारिक जहाज पर अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नाविकों की मौत ने भारत-अमेरिका संबंधों में संवेदनशीलता बढ़ा दी है।
इसके साथ ही ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ के बाद युद्धविराम के श्रेय को लेकर बयानबाजी, तथा अमेरिकी टैरिफ नीतियों को लेकर मतभेद भी दोनों देशों के बीच तनाव की पृष्ठभूमि माने जा रहे हैं। बीते महीनों में अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए आयात शुल्क और बाद में दोनों देशों के बीच हुए व्यापार समझौते ने संबंधों में अस्थिरता को उजागर किया है। हालांकि समझौते के बाद स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिला, लेकिन पूर्ण स्थिरता अभी भी नहीं आई है।
बुधवार की बैठक पर दुनिया की नजरें
इस संक्षिप्त मुलाकात को आने वाली द्विपक्षीय बैठक की भूमिका माना जा रहा है, जो बुधवार शाम भारतीय समयानुसार लगभग 6:30 बजे प्रस्तावित है।
साउथ ब्लॉक सूत्रों के अनुसार, इस उच्चस्तरीय वार्ता में व्यापार, रक्षा सहयोग, रणनीतिक साझेदारी, क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया की स्थिति पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। ओमान खाड़ी से जुड़े मुद्दे भी एजेंडे में शामिल रह सकते हैं।
क्या फिर से लौटेगी पुरानी गर्मजोशी?
कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही यह मुलाकात औपचारिक रही हो, लेकिन असली तस्वीर बुधवार की बैठक के बाद ही साफ होगी। संभावना जताई जा रही है कि दोनों नेता एक बार फिर संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश कर सकते हैं।
फिलहाल, यह स्पष्ट है कि इस बार G7 मंच पर गर्मजोशी की जगह संयम और औपचारिकता हावी रही, जिसने भारत-अमेरिका रिश्तों पर नई बहस छेड़ दी है।