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अकाल तख्त ने भगवंत मान को ‘गुरु दोखी’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित किया

भाजपा ने कहा- ' घोषणा के दूरगामी असर होंगे'। 29 जून को सिख विधायकों को बुलावा।

By डॉ. अभिज्ञात

Jun 16, 2026 18:41 IST

नई दिल्ली: अकाल तख्त ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को ‘गुरु दोखी’ (गुरु विरोधी) और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित किया है। इस घोषणा पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कहा है कि इसके राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक प्रभाव पड़ सकते हैं।

सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने सोमवार को यह निर्णय सुनाते हुए समुदाय के लोगों से भगवंत मान के साथ सामाजिक और धार्मिक संबंध सीमित रखने का आह्वान किया था। यह कार्रवाई एक कथित आपत्तिजनक वीडियो को लेकर उठाए गए विवाद के बाद की गई।

वीडियो को लेकर बढ़ा विवाद

अकाल तख्त के अनुसार, संबंधित वीडियो की जांच के लिए कराई गई फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट में यह निष्कर्ष सामने आया कि वायरल वीडियो वास्तविक है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से तैयार नहीं किया गया है। हालांकि मुख्यमंत्री मान लगातार यह कहते रहे हैं कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं।

बीजेपी ने जताई कड़ी प्रतिक्रिया

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए कहा कि सिख गुरुओं और सिख मर्यादा के प्रति सम्मान किसी भी स्थिति में समझौते का विषय नहीं हो सकता। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर कहा कि अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज के मुताबिक वीडियो की जांच दो अलग-अलग फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं में कराई गई थी और दोनों ने इसे असली बताया है।

पूनावाला का कहना है कि अकाल तख्त की ओर से आए इस फैसले का पंजाब की राजनीति और सामाजिक परिदृश्य पर दूरगामी असर पड़ सकता है।

29 जून को सिख विधायकों को बुलावा

अकाल तख्त ने एक अन्य निर्णय में पंजाब के सभी सिख विधायकों को, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों, 29 जून को अपने समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया है। यह बैठक कथित धर्म-अपराध (बेअदबी) विरोधी कानून से जुड़े मुद्दों पर आयोजित की जा रही है।

जनवरी से चल रहा है मामला

यह विवाद जनवरी 2026 में शुरू हुआ था, जब अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री मान को तलब किया था। उन पर ‘गुरु की गोलक’ (गुरुद्वारे के दान पात्र) को लेकर टिप्पणी करने और एक वीडियो में सिख गुरुओं तथा दिवंगत उग्रवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीरों के साथ कथित रूप से आपत्तिजनक व्यवहार करने के आरोप लगे थे।

15 जनवरी को अकाल तख्त के समक्ष पेश होकर मान ने अपना पक्ष रखा था। उन्होंने कहा था कि संबंधित वीडियो फर्जी है या फिर AI तकनीक से तैयार किया गया है। साथ ही उन्होंने सुझाव दिया था कि इसकी जांच देश की किसी भी फॉरेंसिक प्रयोगशाला से कराई जा सकती है। अब फॉरेंसिक रिपोर्ट और अकाल तख्त के फैसले के बाद यह मामला पंजाब की राजनीति में नए विवाद और बहस का कारण बन गया है।

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